अरबों रुपये फूंका, पढ़ाई में सूखा
- 1800 शिक्षकों की कमी से जूझ रहे बेसिक व माध्यमिक स्कूल
- जिले में सरकारी योजनाओं पर नहीं हो रहा अमल
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर।
बेसिक और माध्यमिक शिक्षा की गाड़ी शिक्षकों और संसाधनों की कमी को झेलते हुए घिसट रही है। शिक्षकों की कमी परिषदीय स्कूलों और राजकीय माध्यमिक विद्यालयों की लाइलाज बीमारी बन गई है। शिक्षा के अधिकार और राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान पर भी संसाधनों की कमी हावी होती जा रही है। जिले में शिक्षा पर अब तक अरबों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन नतीजा सिफर दिख रहा है।
जिले में 16 ब्लॉक, सात तहसीलें, आठ नगरपालिका परिषद व नौ नगर पंचायतें हैं। बेसिक शिक्षा परिषद के परिषदीय स्कूलों की संख्या 2300 है और इनमें 2.90 लाख बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं। स्थिति यह है कि किसी स्कूल में एक शिक्षक तो किसी स्कूल में पांच से आठ तक शिक्षक तैनात हैं। इनमें करीब छह हजार शिक्षक तैनात हैं। प्राथमिक स्कूल में 30 छात्रों पर व जूनियर में 35 छात्रों पर एक-एक टीचर की तैनाती होनी चाहिए। इन स्कूलों में करीब दो हजार और शिक्षक होने चाहिए। जिले के 369 माध्यमिक विद्यालयों का आलम यह है कि जिले करीब 1800 शिक्षक और चाहिए। शिक्षकों की कमी के चलते स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। जूनियर स्कूलों में विज्ञान प्रयोगशाला नहीं है तो परिषदीय विद्यालय कुर्सी-मेज की कमी झेल रहे हैं। खेलों का इंतजाम न होने से बच्चों का शारीरिक विकास नहीं हो पाता है। शुद्ध पेयजल की स्थिति किसी भी विद्यालय में ठीक नहीं है तो शौचालय भी बदहाल पड़े हैं। खास बात यह है कि शिक्षण संस्थानों खासकर परिषदीय स्कूलों में सरकारी योजनाआें का सही तरीके से अमल नहीं हो रहा।
कोट-
परिषदीय स्कूलों में शिक्षा स्तर को बनाए रखने और सरकारी योजनाओं के सही क्रियान्वयन के लिए समय-समय पर जांच की जाती है। शिक्षकों की कमी से विभाग को अवगत करवा दिया गया है। शिक्षकों की स्कूल में उपस्थिति को लेकर प्रयास किए जा रहे हैं।
- अजीत कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, बुलंदशहर।
माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी है और यह कमी जल्द दूर होने वाली है। शासन ने शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए ब्योरा मांगा है, जिसे जुटाकर जल्द भेज दिया जाएगा। शिक्षा के स्तर को बनाए रखने और सरकारी योजनाआें का विद्यार्थियाें को लाभ देने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। - मनोज कुमार आर्य, जिला विद्यालय निरीक्षक, बुलंदशहर।
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परिषदीय विद्यालयों के बच्चों
को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं
अमर उजाला ब्यूरो
सिकंदराबाद। औद्योगिक क्षेत्र स्थित फैक्ट्रियों के सहयोग से परिषदीय विद्यालयों में भी निजी स्कूल जैसी सुविधाएं देने की कवायद चल रही है। इसी क्रम में बृहस्पतिवार को एसडीएम ने कजारिया टाइल्स द्वारा निजी स्कूल की तर्ज पर विकसित किए गए प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक स्कूल का हवन यज्ञ के साथ उद्घाटन किया।
एसडीएम ने बताया कि दोनों विद्यालयों में छात्र-छात्राओं को शुद्ध पेयजल, शौचालय, फर्नीचर, विद्युत की व्यवस्था, पंखे, कमरों का मानक के अनुसार निर्माण, खेल का मैदान समेत वह सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जो निजी स्कूलों द्वारा कराई जाती हैं। एसडीएम के प्रयासों से पूर्व में राजारामपुर, हसनपुर जागीर, जोखाबाद, किशनपुर बिशनपुर आदि परिषदीय विद्यालयों को फैक्ट्री मालिकों के सहयोग से निजी स्कूलों की तर्ज पर विकसित किया जा चुका है। एसडीएम ने बताया कि परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए फैक्ट्रियों के सहयोग से परिषदीय स्कूलों को निजी स्कूल की तर्ज पर विकसित कराने का प्रयास जारी रहेगा। उन्होंने सहयोग करने के लिए गोपालपुर के प्रधान धीरेंद्र का भी आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर तहसीलदार इंद्र नंदन सिंह, कजारिया के वीपी अरुण लाल, एचआर हेड डीपी सिंह समेत क्षेत्र के गणमान्य लोग, छात्र-छात्राएं और अभिभावक मौजूद रहे।