विरोध, सवाल...व्यापार के आगे सब बौने
- चयनित दुकान से ही किताबें खरीदने का दबाव
- अभिभावकों ने की लखनऊ जैसी कार्रवाई कराने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
जहांगीराबाद। शिक्षण सत्र आरंभ होने के साथ ही स्कूल, कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया अंतिम दौर में है। रोजाना अभिभावकों का स्कूलों में तांता लग रहा है। बच्चे को अच्छे स्कूल में दाखिला मिल सके, इसके लिए अभिभावक स्कूल की हर शर्त मानने को तैयार नजर आ रहे हैं। वहीं निजी स्कूल एक ओर जहां प्रवेश के नाम पर मोटी रकम अभिभावकों से वसूल कर रहे हैं, वहीं चयनित दुकान से ही किताबें खरीदने का अभिभावकों पर दबाव भी बना रहे हैं।
कमीशन के खेल के चलते अभिभावकों की जेब ढीली की जा रही है। हैरत की बात तो यह है कि कई निजी स्कूलों की ओर से किताबों की जो पर्ची दी जा रही है उस पर संबंधित दुकान का नाम भी लिखा हुआ है। इन दुकानों पर पहले से ही पेटी में हर कक्षा का कोर्स मौजूद है। बस अभिभावकों की ओर से कक्षा का नाम बताया जा रहा है और फौरन पहले से तैयार पेटी उन्हें थमा दी जा रही है। ऐसे में कई अनुपयोगी वस्तुओं की भी कीमत अभिभावकों को चुकानी पड़ रही है।
लखनऊ जैसी कार्रवाई की मांग
अभिभावक चेतन गुप्ता, अमल, संजय गोयल, जावेद अनवर, अजमेरी व कलुआ सैनी आदि ने कहा कि विगत वर्ष 11 अप्रैल को लखनऊ में एक अभिभावक की शिकायत पर जिला विद्यालय निरीक्षक ने दो स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की थी। यहां स्कूल की ओर से चयनित दुकान से ही कोर्स की किताबें और कॉपियां आदि खरीदने का दबाव अभिभावक पर बनाया गया था। यहां भी कई निजी स्कूल ऐसा ही कर रहे हैं, लेकिन अभिभावकों की ओर से शिकायत न करने के कारण विभागीय अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।
अभिभावक किसी भी प्रमाणित दुकान से किताबें आदि खरीदने के लिए स्वतंत्र हैं। अगर निजी स्कूलों की ओर से चयनित दुकानों से ही किताबें खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है तो अभिभावक तत्काल शिकायत करें। मामले में कार्रवाई की जाएगी।
- मनोज कुमार आर्य, जिला विद्यालय निरीक्षक