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गरीबों का फ्रिज हुआ महंगा, गर्मी में सबसे ज्यादा कारगर है यह देशी फ्रिज

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मांग बढ़ते ही गरीबों का
देसी ‘फ्रिज’ हुआ महंगा
गर्मी में पानी ठंडा करने में कारगर है मिट्टी का घड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
बुगरासी/बीबीनगर। गर्मी में शहरी इलाकों भले ही ठंडे पानी फ्रिज भले ही लोगों की जरूरत बन गई हो, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में अब भी घरों में ठंडे पानी के लिए घड़े का प्रयोग किया जाता है। घड़े को देसी फ्रिज के नाम से जाना जाता है। इसका पानी स्वास्थ्य के लिए भी हितकर होता है। गर्मी की शुरुआत में मांग बढ़ने के साथ ही देसी फ्रिज के रेट दोगुने हो गए हैं।
ग्रामीण क्षेत्र में बड़े मकान और खुला आंगन होता है। आंगन में ही नल लगा होता है। गर्मी में दोपहर के समय आंगन में गर्मी में चलते चलना भी मुश्किल होता है। ज्यादा गर्मी पड़ने पर नलों से भी गर्म पानी निकलता है। इसके विकल्प में ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादातर घरों में लोग घड़े में पानी भरकर रखते हैं। बिजेंद्र सिंह लोधी, देवेंद्र चौधरी, अनिल कुमार, अनुज त्यागी आदि ग्रामीणों ने बताया कि घड़े में पानी भरकर उसे ठंड वाले स्थान पर रख दिया जाता है। कुछ घरों में बालू रेत को गीला कर उसपर घड़ा रखकर पर गीला कपड़ा डाल देते हैं। हल्की हवा चलने के बाद घड़े का पानी किसी फ्रिज से कम ठंडा नहीं होता है। एक माह पूर्व तकरीबन 70 रुपये का बिकने वाला गरीबों का देसी फ्रिज अब 150 रुपये में मिल रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि बदलते मौसम के साथ ही घड़ों की भी मांग बढ़ने लगी है, जिसके चलते घड़ों के रेट में उछाल आया है।
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टोंटी लगा होने से पानी निकालना आसन
पहले घड़े सादा तरीके से बनाए जाते थे। पीने के लिए जब भी पानी की जरूरत पड़ती तो घड़े में पड़ी एक कटोरी बंधी हुई छड़ी से पानी ले लिया करते थे। अब घड़ों में भी टोंटी लगाई जाने लगी है। प्रमोद कुमार, प्रियांशु, गौरव कुमार आदि ने बताया कि घड़ों में टोंटी लगा होने से पानी आसानी से निकाला जा सकता है।
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