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बेचारे गन्ना किसान, दबाए बैठे दर्द...

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खेत में खड़ा गन्ना, पर्ची को मारे-मारे फिर रहे किसान
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- सहकारी समिति में पर्ची के नाम पर किसानों से हो रही लूट
- किसानों का आरोप शासन और प्रशासन की सख्ती के बाद भी नहीं सुधरे हालात
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। शासन से लेकर प्रशासन तक गन्ना किसानों को राहत देने के दावे करने के साथ आदेश पर आदेश जारी किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। सहकारी समिति में पर्ची के नाम पर उनसे लूट हो रही है। वह खेत में खड़े गन्ने की पर्ची के लिए मारे-मारे फिर रहे हैं। अपना गन्ना मिल तक पहुंचाने में उन्हें खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि चीनी मिलों में दो-दो दिन तक उनके गन्ने की तोल नहीं हो रही।
अमर उजाला की टीम ने गन्ना किसानों का जाना दर्द - अमर उजाला की टीम ने वेब शुगर मिल पहुंचकर जब किसानों से बात की तो उन्होंने बताया कि किसानों का कोई नहीं है और अब वह रामभरोसे ही रह गया है। समय पर पर्ची नहीं मिलने से उनका गन्ना खेतों में खड़ा है। मिल आने पर दो-दो दिन तक तोल नहीं हो रही और वह रात मिल के यार्ड में ही बिताने को मजबूर हो रहे हैं। सहकारी गन्ना समिति पर्ची के नाम पर लूट कर रही है और पर्ची अभी तक अरली की दी जा रही है, जबकि अभी सामान्य की पर्ची नहीं दी जा रही है। कुल मिलाकर वह हर तरह से परेशान हैं।
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पर्ची के नाम पर हो रही लूट
सहकारी गन्ना समिति ने अभी तक जनरल की पर्ची शुरू नहीं की। समिति में पर्ची के नाम लूट हो रही है और किसान परेशान हैं।
- बबली शर्मा, गांव ख्वासपुर के किसान।
अभी तक चार ही पर्ची मिली
उसकी करीब 90 पर्ची हैं और अभी तक उसे मात्र चार पर्ची ही मिली हैं। वह सहकारी समिति से लेकर अफसरों तक के चक्कर काट रहा है, लेकिन कहीं रास्ता नहीं मिल रहा।
- रामकुमार, गांव वैर के किसान।
खड़ी फसल को डालने की बढ़ी चिंता
अभी उसकी 45 बीघा गन्ने की फसल खेत में खड़ी है और मार्च माह भी आधा बीत गया है। पर्ची समय पर नहीं मिल रही और मिल में तोल भी समय पर नहीं हो रही।
- कैलाश, गांव अलियाना के किसान।
दो-दो दिन तक नहीं हो रही तोल
एक तो पर्ची समय पर नहीं मिल रही। वहीं दूसरी ओर मिल में दो-दो दिन तक तोल नहीं हो रही। ऐसे में रात बितना उनकी मजबूरी बन गई है और कोई सुुुनने वाला नहीं है।
- महेंद्र सिंह, गांव वैर के किसान।
मिल में तोल चल रही धीमी
वेव शुगर मिल में तोल काफी धीमी चल रही है। सबसे पहले सेंटर से आने वाला गन्ना तोला जाता है और जो किसान कई-कई दिन से अपना गन्ना लेकर आए हैं। उनकी कोई नहीं सुन रहा।
- आदेश कुमार, गांव रसूलपुर के किसान।
किसानों की नहीं सुन रहे अधिकारी
जिला गन्ना विभाग हो या फिर सहकारी गन्ना समिति और मिल के अधिकारी किसानों की नहीं सुन रहे। किसान मारे-मारे फिर रहे हैं और किसी को उनकी कोई चिंता नहीं है।
- बिट्टू, गांव अच्छेजा के किसान।
खेत में गन्ना काटे या फिर में रात गुजारे
किसान की कोई सुनने वाला नहीं है। समझ में नहीं आ रहा कि खेत में गन्ना काटे या फिर मिल में रात गुजारे। काफी इंतजार के बाद मिल में तोल होती है और उसके बाद फिर खेत में काम करना होता है।
- सतीश, गांव ख्वासपुर के किसान।
काफी इंतजार के बाद भी नहीं पहुंची पर्ची
अभी खेत में काफी गन्ना खड़ा है और काफी इंतजार के बाद भी पर्ची नहीं पहुंची। कई बार अफसरों से संपर्क किया, लेकिन कोई नहीं सुन रहा। अब समझ में नहीं आ रहा कि वह करें तो क्या करें।
- राहुल सोलंकी, गांव हजरतपुर के किसान एवं प्रधान।
मिलों की मनमानी से मच्छरों की बीच किसान गुजार रहे रात
वेव शुगर मिल में गन्ना लेकर पहुंचे किसान मिल में रात बिताने को मजबूर हैं। इसी तरह के हालात जिले की दूसरी चीनी मिलों के हैं। किसानों का कहना है कि रात के समय वह मच्छरों के बीच रात गुजारने को मजबूर हैं और ठंड भी सहन करनी पड़ रही है।
शासन के आदेश पर अभी री-कलेंडर जारी करने की नहीं हुई पहल
किसनों की परेशानी कम नहीं हो रही। शासन ने हाल ही में आदेश जारी किया था कि किसानों का री-कलेंडर जारी कर गन्ना खरीदा जाए, लेकिन इसकी पहल अभी तक जिले में नहीं हुई है। इस आदेश को लेकर अफसर और कर्मचारी भी सजग नहीं दिखाई दे रहे।

आखिर कौन खरीदेगा 12 लाख कुंतल गन्ना, किसान परेशान
औरंगाबाद। निजी क्षेत्र की अनामिका शुगर मिल के गन्ना किसानों को तगडा झटका लगने वाला है। मिल केवल 58 लाख कुंतल ही गन्ना खरीद करके उसे पैर सकती है, जबकि शुगर मिल के किसानों पर 70 से 75 लाख कुंतल गन्ने की आवक है। ऐसी स्थिति में 12 से 17 लाख कुंतल गन्ने की आखिरकार कौन खरीद करेगा।
बता दें कि अनामिका शुगर मिल के किसानों ने इस बार 13 हजार हेक्टेयर गन्ने की फसल को बोया था। इस हिसाब से किसानों का 70 से 75 लाख कुंतल गनी्ने की आवक बैठती है। शुगर मिल की क्षमता अत्याधिक 58 लाख कुंतल गन्ना पैरने की है। स्थिति यह है कि शुगर मिल न तो 58 लाख कुंतल से ज्यादा गन्ना खरीद सकती है और न ही उसकी पेराई कर सकती है। ऐसे में सवाल है कि 12 से 17 लाख कुंतल गन्ने को आखिर कौन खरीदेगा। मिल पहले से ही ओवरलोड चल रहीहै। इससे साफ है कि किसान अपना गन्ना सस्ते दामों में क्रेशरों पर डालेंगे या डीसीओ के हस्तक्षेप पर ही जिले से बाहर की शुगर मिलों को गन्ना सप्लाई कर सकते हैं। दूसरा सवाल ये है कि आधा मार्च बीत चुका है लेकिन किसानों के अभी तक गन्ने के खेत खाली नहीं हुए हैं। पर्चियां न मिलने के कारण किसान रोजाना शुगर मिल के चककर काटकर थक चुके हैं। किसानों का गन्ना खेतों में खड़ा सूख रहा है। मिल प्रबंधन की मिलीभगत से ही बड़े माफियाओं को भारी मात्रा में गन्ने की पर्चियां उपलब्ध करा दी जाती हैं। जबकि छोटे किसान परेशान हैं। उधर अनामिका शुगर मिल के जीएम पीके मलहोत्रा से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की।
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गन्ने की पर्चियां लेने के लिये मिल गया था वहां कर्मचारी अनुज राठी और शैलेंद्र सिंह ने यह कहकर टरका दिया कि गन्ने को क्रेशरों पर बेच दो या उसमें आग लगा दो।
- किसान सतीश निवासी गांव निसुरखा
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आठ बीघा गन्ने की फसल बो रखी है गन्ने को काटकर खेत में डाल दिया है। पर्चियां न मिलने के कारण गन्ना काला पड़ रहा है।
- सुंदर गिरि निवासी निसुरखा
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छह बीघा गन्ने की फसल है अभी तक एक भी पर्ची नहीं मिली है।
- श्रीपाल सिंह अगौता
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12 घंटे में आ रहा किसानों का नंबर
औरंगाबाद। अनामिका शुगर मिल पर गन्ना लेकर पहुंच रहे किसानों का नंबर करीब बारह घंटे में आ रहा है। शुगर मिल पर न तो पशुओं के लिये पानी पीने की व्यवस्था और न ही किसानों के लिए। किसानों के ठहरने का भी कोई इंतजाम नहीं है। रात के समय किसान ज्यादा परेशान रहते हैं।

कोट
किसानों को समय पर पर्ची और उनकी समस्याओं को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। शासनादेश के तहत जल्द ही जिले में सर्वे चलेेेगा और री-कलेंडर जारी किए जाएंगे। किसानों को किसी तरह की परेशानी नहीं आने दी जाएगी। वह चीनी मिलों से लगातार संपर्क बनाए हुए हैं।
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- एपी सिंह, जिला गन्ना अधिकारी
कोट
मिल के बॉयलर में कई दिन पहले तकनीकी खराबी आ गई थी। मिल रोजाना 25 हजार क्विंटल गन्ने की पेराई कर रहा है। किसानों की समस्याओं को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
- केपी सिंह, वेव शुगर मिल के महाप्रबंधक
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