जब तक सूरज-चांद रहेगा, जगपाल सिंह का नाम रहेगा
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- सैनिक सम्मान के साथ शहीद जगपाल का हुआ अंतिम संस्कार
- जम्मू के सांबा बार्डर पर शहीद हुए थे भैंसरोली गांव के जगपाल सिंह
- प्रभारी मंत्री स्वतंत्र देव समेत प्रशासनिक अफसर और नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर/शिकारपुर।
जम्मू में पाक सेना से लोहा लेते समय शहीद हुए बीएसएफ के हेडकांस्टेबल का रविवार को सैनिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान प्रशासनिक अफसरों और राजनीतिक दलों के नेताओं सहित हजारों लोगाें ने ‘जब तक सूरज-चांद रहेगा, जगपाल सिंह तेरा नाम रहेगा’ के नारे लगाए। सभी लोगों ने पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन कर नम आंखों से विदाई दी। शहीद के पार्थिव शरीर को उनके पुत्र गौरव चौधरी ने मुखाग्नि दी। बीएसएफ की टुकड़ी ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया।
गांव भैंसरौली नासिरपुर निवासी जगपाल सिंह बीएसएफ की 173 बटालियन में हेड कांस्टेबल थे। शुक्रवार को जम्मू के सांबा सेक्टर में पाकिस्तान द्वारा सीजफायर का उल्लंघन करते हुए बीएसएफ की चौकी पर गोलीबारी की गई थी। जवाबी कार्रवाई में गोली लगने से जगपाल सिंह शहीद हो गए थे। इसकी सूचना उसी दिन दोपहर बाद गांव में पहुंच गई थी। सूचना मिलते ही गांव में शोक की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों के साथ रिश्तेदार और आसपास के गांव से महिला और पुरुष शहीद के परिवार को सांत्वना देने पहुंचने लगे। शनिवार को प्रशासनिक अफसर और राजनीतिक दलों के नेता भी शहीद के परिवार से मिलने पहुंचे। बीएसएफ के अफसरों ने संपर्क करने पर बताया था कि शहीद का पार्थिव शरीर रविवार सुबह गांव में पहुंच जाएगा। जिला प्रशासन की ओर से सभी तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। शहीद का पार्थिव शरीर करीब नौ बजे गांव में पहुंचा तो कोहराम मच गया। शहीद के अंतिम दर्शन के लिए लोग उमड़ पड़े। पार्थिव शरीर को देख बेटा गौरव चौधरी, बेटी निशा, बुलबुल, गीता और बबीता के साथ पत्नी करतारी देवी रो-रोकर बेहोश हो गए। इस दौरान सभी आंखों से आंसू बह रहे थे और उनकी शहादत को सलाम कर अंतिम विदाई दी। शासन की ओर से शहीद की पत्नी को प्रभारी मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने 20 लाख रुपये की राशि का सहायता चेक देते हुए हर संभव मदद का भरोसा दिया। प्रशासन की ओर से डीएम डॉ. रोशन जैकब, प्रभारी एसएसपी पीके तिवारी, एडीएम प्रशासन डॉ. अरविंद मिश्र, एसडीएम शिकारपुर अविनाशचंद मौर्य और जिला भूमि संरक्षण अधिकारी डॉ. घनश्याम सहित के अलावा अन्य प्रशासनिक और पुलिस अफसर शामिल रहे।
शहीद के दर्शन करने और अंतिम विदाई देने के लिए शिकापुर से भाजपा विधायक अनिल शर्मा, सदर विधायक वीरेंद्र सिंह सिरोही, भाजपा जिलाध्यक्ष हिमांशु मित्तल, युवा जिलाध्यक्ष लक्ष्मीराज सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रदीप चौधरी, रालोद जिलाध्यक्ष आसिफ गाजी, पूर्व मंत्री किरनपाल सिंह, कांग्रेस से जिलाध्यक्ष पंडित सुभाष गांधी, प्रदेश प्रवक्ता चौधरी श्यौपाल सिंह, नगर अध्यक्ष मुनीर अकबर, जिला पंचायत सदस्य सुनील चरौरा सहित अन्य राजनेता और कार्यकर्ता भी शामिल हुए। अंतिम संस्कार के बाद रालोद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयंत चौधरी शहीद के परिवार को ढांढस बंधाने पहुंचे। उन्हाेंने सरकार से शहीद के परिवार को आर्थिक मदद, पुत्र को नौकरी, परिवार के भरण-पोषण के साथ गांव में अस्पताल, हाईवे गांव को आने वाले मार्ग पर शहीद के नाम से गेट बनाने, शहीद स्मारक बनाने और श्मशान घाट बनवाने की मांग की। इस दौरान जिलाध्यक्ष आसिफ गाजी, पूर्व जिलाध्यक्ष राजीव चौधरी, युवा रालोद संगठन के प्रदेश महासचिव डॉ. कुंवरवीर सिंह, युवा जिलाध्यक्ष सुशील गुर्जर आदि शामिल रहे।
शहादत पर पत्नी, बेटा-बेटी व भाइयों को नाज
शहीद जगपाल सिंह की शहादत पर उनके भाई रजपाल सिंह और ब्रजेश कुमार के साथ पत्नी करतारी देवी, पुत्र गौरव चौधरी और बेटियों को नाज है। उनका कहना है कि देश के लिए उनकी कुर्बानी को वह कभी नहीं भूला पाएंगे। पुत्र गौरव का कहना है कि यदि सब कुछ ठीक रहा तो वह भी सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करेगा।
सलेमपुर से पार्थिव शरीर को जयकारों के साथ गांव लेकर पहुंचे युवा
शहीद के पार्थिव शरीर को गांव के युवा बाइक रैली के माध्यम से गांव लेकर पहुंचे। इस दौरान 300 से अधिक बाइक शामिल थीं और उन पर सवार युवा जब तक सूरज-चांद रहेगा जगपाल सिंह तेरा नाम रहेगा के नारे लगाते हुए और हाथ में तिरंगा लेकर चल रहे थे। जैसे ही पार्थिव शरीर गांव में पहुंचा तो पहले से मौजूद लोगों ने भारत माता की जय और पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाकर शहीद जगपाल की जय जयकार की। सभी की मांग थी कि अब पाकिस्तान को सबक सिखाने का समय आ गया है। शहीद के अंतिम दर्शन के लिए गांव ही नहीं, अपितु आसपास के दर्जनों गांवों से महिला और पुरुषों के साथ बच्चे भी पैदल और वाहनों से पहुंच गए। इसके चलते इतनी भीड़ हो गई कि पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने में भारी मशक्कत करनी पड़ी। एक मकान की छत से कूदते समय एक युवक दूसरे मकान की छत टूटने से उसमें फंस गया। गनीमत यह रही कि उसे चोट नहीं आई। गांव में किसी भी घर चूल्हा नहीं जला।
शहीद और उसके ताऊ की एक साथ बने समाधि
शहीद जगपाल सिंह के ताऊ शिवलाल सिंह आजाद हिंद फौज के सिपाही और स्वतंत्रता सेनानी थे। मगर, उस समय वह सिंगापुर की लड़ाई में गए थे और वहीं शहीद हो गए थे। इसके चलते आज तक उनकी अस्थियां भी नहीं मिल पाईं। वह अविवाहित थे। परिजनों और ग्रामीणों की मांग है कि शहीद जगपाल और उनके ताऊ की एक जगह समाधि बनाई जाए। इस पर डीएम डॉ. रोशन जैकब ने आश्वासन देते हुए कहा कि शहीद के नाम से गांव में अस्पताल और सड़क निर्माण का कार्य शीघ्र किया जाएगा। अन्य मांगें भी पूरी की जाएंगी।
एक ही रात में भर गए सड़क के गड्ढे
गांव सलेमपुर को मांगलौर और शिवाली को जोड़ने वाली सड़क गांव भैंसरौली नासिरपुर को भी जोड़ती है। यह सड़क पिछले काफी समय से बदहाल थी, लेकिन शनिवार को डीएम के आदेश पर इस सड़क के गड्ढेे एक ही रात में भर दिए गए। इतना ही नहीं गांव के श्मशान घाट को भी रातोंरात समतल कर दिया गया। गांव में रात भर प्रशासनिक अफसर डटे रहे और साफ-सफाई आदि में जुटे रहे।