झोलाछाप के बिछौने पर गूंज रहीं किलकारियां
- 30 वर्षाें से बंद पड़ा है जहांगीराबाद का महिला चिकित्सालय
- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में वैकल्पिक की है प्रसव की व्यवस्था
हेमंत कौशिक
जहांगीराबाद।
प्रदेश सरकार भले ही संस्थागत प्रसव पर प्रति वर्ष करोड़ों रुपये खर्च कर रही हो, लेकिन जहांगीराबाद क्षेत्र मेें गर्भवती महिलाएं आज भी अप्रशिक्षित दाई और अपंजीकृत चिकित्सकों से प्रसव करानेे के लिए मजबूर हैं। इसका प्रमुख कारण विभाग की उदासीनता है। पिछले करीब तीस वर्षों से जहांगीराबाद का महिला अस्पताल चिकित्सकों के अभाव में बंद पड़ा है। इस अस्पताल का भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। यहां तक कि चहारदीवारी की ईंटें तक लोग उखाड़कर ले जा चुके हैं।
गर्भवती महिलाओं के लिए सरकारी अस्पताल तक लाने एवं प्रसव के बाद उन्हें घर तक पहुंचाने के लिए शासन ने 102 एंबुलेंस चला रखी है। इतना ही नहीं सरकारी अस्पताल में गर्भवती महिलाओं की सभी जांचें नि:शुल्क करने के साथ ही अल्ट्रासाउंड एवं आवश्यकता पड़ने पर ब्लड की भी निशुल्क व्यवस्था की जाती है, लेकिन जहांगीराबाद के अस्पताल में इनमें से कोई भी सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसके चलते कई गर्भवती महिलाएं अप्रशिक्षित दाई एवं अपंजीकृत डाक्टरों के चक्त्रस्व्यूह में फंस ही जाती हैं। यहां उन्हें न तो सही उपचार ही मिल पाता है और न ही दवाएं मिल पाती हैं। कई मामलों में अत्यधिक रक्त बहने एवं महिला की हालत खराब होने पर समय से उपचार नहीं मिलने के कारण प्रसूता एवं नवजात की मौत भी हो जाती है।
सीएमओ डा. के एन तिवारी का कहना है कि अधिक से अधिक प्रसव संस्थागत कराए जाएं, इसके लिए आशाओं को निर्देश दिए जा रहे हैं। यदि कहीं कोई झोलाछाप चिकित्सक प्रसव कराने में शामिल पाया गया तो ऐसे लोगों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।