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जल स्तर गिर रहा, फिर भी खत्म कर दिए डार्कजोन

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जल स्तर गिर रहा, फिर भी खत्म कर दिए डार्कजोन
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- बिना पूर्व इंतजाम के डार्कजोन खत्म करने से बढ़ेगा जल संकट
- 16 में से 11 ब्लॉकों में जल स्तर 180 फिट से नीचे
- शासन ने सभी घोषित डार्कजोन को किया समाप्त
- जिले में 16 ब्लॉक में से 11 ब्लॉक घोषित थे डार्कजोन
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर।
शासन ने जिले में डार्क जोन को समाप्त कर किसानों को बड़ी सौगात तो दे दी, लेकिन डार्क जोन समाप्त करने से पहले इन ब्लॉकों के गिरते जलस्तर को उठाने के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं किए। नतीजतन इन इलाकों में अब नलकूप कनेक्शन दिए जाने से जल संकट और गहराने की आशंका है।
जिले के ब्लॉकों में गिरते जलस्तर को देखते हुए पूर्व में शासन ने छह ब्लॉकों गुलावठी, खुर्जा, सिकंदराबाद, दानपुर, शिकारपुर व बीबीनगर को डार्क जोन घोषित कर दिया था। इसके बाद दो अन्य ब्लॉकों में स्थिति गंभीर हुई तो अरनिया व अनूपशहर भी डार्क जोन में शामिल कर दिए गए। इसके अलावा स्याना, ऊंचागांव व डिबाई ब्लॉक उस समय सेमी क्रिटिकल जोन में शामिल थे। स्थिति गंभीर हुई तो इन तीनों ब्लॉकों को भी डार्क जोन में शामिल कर दिया गया, जबकि गत दिनों बुलंदशहर व पहासू ब्लॉक भी डार्क जोन में शामिल हो गए। अफसरों के मुताबिक इन ब्लॉकों में जलस्तर 200 फिट से नीचे पहुंच गया है। इसके कारण जिले के कुल 16 में से 11 ब्लॉक डार्क जोन घोषित हो चुके थे। प्रदेश में सरकार बदलते ही शासन ने इन सभी ब्लॉकों को डार्क जोन से बाहर कर दिया। ऐसे में डार्क जोन समाप्त करने के बाद इन ब्लॉकों में धड़ाधड़ ट्यूबवेल कनेक्शन जारी होंगे, इससे इन क्षेत्रों में जलस्तर की स्थिति सुधरने की बजाए और गंभीर होती जाएगी।
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अभी तक बेअसर रहे हैं प्रशासन के प्रयास
डार्क जोन में जलस्तर को बढ़ाने के लिए अब तक प्रशासन के प्रयास पूरी तरह से बेअसर रहे हैं। इन ब्लॉकों में पूर्व में सबमर्सिबल और ट्यूबवेल कनेक्शन लगाने के लिए बोरिंग नहीं किए जाते थे। प्रशासनिक अफसर दावा कर रहे हैं कि जलस्तर सुधारने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन अब बोरिंग होने से जलस्तर और घटेगा और स्थिति अत्यंत गंभीर होती चली जाएगी।

दो गंग नहर व गंगा नदी भी नहीं बढ़ा सकी जलस्तर
जिले से होकर गुजर रही दो गंग नहर व मोक्षदायिनी गंगा भी जलस्तर में इजाफा नहीं कर सकी। गंगा नदी के किनारे बसे डिबाई, ऊंचागांव और गंग नहरों के समीप बसे बुलंदशहर, स्याना में भी जलस्तर लगातार गिरता जा रहा है।

रेन वाटर हार्वेस्टिंग नहीं रहा कामयाब
सरकारी व बड़ी निजी बिल्डिंगों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के लिए सरकार ने आदेश जारी किए। आदेशों के बाद करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन बारिश के पानी का संचय करने में अफसर पूरी तरह से नाकाम रहे। इसके कारण भी जलस्तर उठने की बजाए और गिरता चला गया।

अब तालाबों के सहारे जलस्तर उठाने की कोशिश
डार्क जोन समाप्त करने से पहले शासन ने सभी गांवों में तालाब खुदवाने के आदेश दिए हैं। शासन को उम्मीद है कि तालाबों के सहारे क्षेत्र में जलस्तर को उठाया जा सकेगा। शासन के आदेश पर जिले के आधे से अधिक गांवों में तालाब खुदवा दिए गए हैं तो कुछ में पोखरों का पुनरुद्धार कर जल स्तर बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।

अब मिलेंगे ट्यूबवेल कनेक्शन
शासन ने आदेश जारी कर डार्क जोन को समाप्त करने की घोषणा कर दी है। इसके बाद अब इन ब्लॉकों में ट्यूबवेलों के लिए धड़ाधड़ कनेक्शन जारी हो सकेंगे। पावर कॉरपोरेशन एक्सईएन डीसी शर्मा ने बताया कि शासन ने डार्क जोन समाप्त कर दिए गए हैं। इसके लिए आदेश मिल चुके हैं। अब सभी क्षेत्रों में ट्यूबवेल कनेक्शन जारी किए जाएंगे।

धान की खेती ने गिराया जलस्तर
जानकारी के अनुसार तिलहन व दलहन के लिए कम पानी की आवश्यकता होती है जबकि धान की खेती के लिए अधिक पानी की आवश्यकता होती है। तिलहन व दलहन की खेती का दायरा कम होता गया और धान की खेती का दायरा बढ़ता गया, जिसके कारण जलस्तर में लगातार गिरावट जारी रही।
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कोट-
शासन ने डार्क जोन समाप्त करने के आदेश दिए हैं। जलस्तर बढ़ाने के लिए शासन ने तालाब व पोखरों का पुनरुद्धार और रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के आदेश दिए हैं। कार्य प्रगति पर है। इससे जलस्तर बढ़ाने में मदद मिलेगी। - श्यौदान सिंह, इंजीनियर, लघु सिंचाई
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