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एससी जज प्रकरण से आहत हैं जस्टिस डीपी गुप्ता

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एससी जज प्रकरण से आहत हैं सेवानिवृत्त जस्टिस डीपी गुप्ता
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- चार जजों की प्रेस कांफ्रेंस को बताया अनुचित
गुलावठी। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस डीपी गुप्ता उच्चतम न्यायालय के चार जजों द्वारा प्रेस कांफ्रेंस किए जाने से आहत महसूस कर रहे हैं। डीपी गुप्ता ने यहां अपने आवास पर बातचीत में कहा कि उच्चतम न्यायालय के संबंध में मीडिया के माध्यम से जो प्रकरण सामने आया है, वह अत्यंत दुखद एवं दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्हाेंने कहा कि उच्चतम न्यायालय के चार माननीय वरिष्ठ न्यायाधीशों द्वारा प्रेस कांफ्रेंस किए जाने के अभूतपूर्व कदम से बचा जा सकता था। डीपी गुप्ता के अनुसार हर व्यक्ति में अच्छाई व बुराई मौजूद रहती हैं। आत्म अनुशासन, आत्म नियंत्रण और विवेक के द्वारा व्यक्ति बुराई को नियंत्रित कर अच्छा बनता है। उच्च पदों पर बैठे व्यक्तियों के व्यवहार व चाल चलन का प्रभाव जन मानस पर पड़ता है। ‘जैसा राजा तैसी प्रजा’ वाली कहावत सदियों से चली आ रही है। डीपी गुप्ता के अनुसार उच्चतम न्यायालय के चार वरिष्ठ न्यायाधीशों द्वारा कही गई बातें जो मीडिया के माध्यम से सामने आई हैं, हम नहीं चाहते कि 20 साल के बाद कोई आत्मा बेचने जैसा जुमला कसे। मुख्य न्यायाधीश पर महाभियोग की बात करना लोकतंत्र खतरे में है और जूनियर जजों को केस देने पर ऐतराज करना, ऐसी बातों से परिपक्वता नहीं झलकती।
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उन्होंने कहा कि शास्त्रों के अनुसार संसार में व्यक्ति को गिराने में जो चीजें मुख्य होती हैं, उनमें धन दौलत, जमीन जायदाद, कामिनी और कीर्ति है। जिसने इन पर नियंत्रण कर लिया, वह व्यक्ति देव तुल्य हो जाता है। यही अपेक्षा न्यायाधीश से भी की जा सकती है। न्यायाधीश आधुनिक युग के ऋषि मुनि हैं। डीपी गुप्ता के अनुसार मीडिया में पूरा प्रकरण आने के बाद इस प्रकरण में न्यायाधीशों का नहीं, बल्कि उत्तेजित व्यक्तियों का अहम भाव व कीर्ति भाव प्रकट होता है। इस प्रकरण से न्याय क्षेत्र के संस्थान को हुई क्षति से लोकतंत्र व देश को बचाया जाना चाहिए। आशा है सभी मिलकर ऐसा करेंगे, जिससे न्याय व्यवस्था में और अधिक विश्वास पैदा हो व लोकतंत्र मजबूत और न्याय संगत बने। डीपी गुप्ता इलाहाबाद उच्च न्यायालय में न्यायाधीश बनने से पहले न्यायिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान लखनऊ के निदेशक रहे हैं।
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