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गंगा नदी में बढ़ा डॉल्फिन का कुनबा

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गंगा नदी में बढ़ा डॉल्फिन का कुनबा
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- बिजनौर बैराज से नरौरा बैराज तक की गई डॉल्फिन की गणना
- डॉल्फिन की संख्या 30 से बढ़कर हुई 32
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर/नरौरा। गंगा नदी में डॉल्फिन का कुनबा बढ़ गया है। विगत वर्ष 2016 में हुई गणना के अनुसार डॉल्फिन की संख्या 30 थी, जो इस वर्ष बढ़कर 32 हो गई है। रविवार को बिजनौर बैराज से नरौरा बैराज तक की गई डॉल्फिन की गणना में इसका खुलासा हुआ।
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गंगा नदी में डॉल्फिन की गणना की शुरूआत बिजनौर बैराज से की गई गई। यह गणना विश्व प्रकृति निधि भारत एवं वन विभाग उप्र के संयुक्त प्रयास से ‘मेरी गंगा मेरी सूस’ अभियान के अंतर्गत की गई है। डॉल्फिन की गणना के लिए पांच दिन पहले टीम को बिजनौर के डीएफओ सिमरण एम ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह टीम बिजनौर से चलकर मेरठ, हापुड़ और अमरोहा होते हुए रविवार को बुलंदशहर पहुंची। यहां पर इस टीम का बुलंदशहर के डीएफओ वीके जैन ने स्वागत किया। इस दौरान उनकी देखरेख में नरौरा बैराज में डॉल्फिन की गणना की गई। डीएफओ वीके जैन ने बताया कि डॉल्फिन की गणना का काम संपन्न हो गया है। बिजनौर से नरौरा बैराज तक वर्ष 2016 में की गई गणना में डॉल्फिन की संख्या 30 थी। पिछले पांच दिन से चल रही डॉल्फिन की गणना में दो और डॉल्फिन पाई गई हैं। डॉल्फिन के दो शावक बिजनौर क्षेत्र में देखे गए हैं। उन्होंने बताया कि गंगा का यह क्षेत्र डॉल्फिन के प्रजनन के लिए अनुकूल है और यहां पर डॉल्फिन के शावक फल-फूल रहे हैं। विश्व प्रकृति निधि भारत के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी शाहनवाज खान ने डॉल्फिन को नदी का टाइगर बताते हुए कहा कि जैसे टाइगर जंगल के परिस्थितकीय तंत्र में सबसे ऊपर है। ठीक उसी तरह डॉल्फिन भी गंगा नदी के परिस्थितकीय तंत्र में शीर्ष पर है। यह नदी के परिस्थितिकीय तंत्र को संतुलित बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है। समन्वयक संजीव यादव ने बताया कि बिजनौर से बुलंदशहर के बीच गंगा का यह क्षेत्र जलीय जैव विविधता से परिपूर्ण है। इसमें डॉल्फिन के अतिरिक्त अन्य संकटग्रस्त प्रजातियां जैसे घड़ियाल और कछुए भी वास करते हैं और गंगा नदी को स्वच्छ और निर्मल बनाए रखने में सहायक हैं।
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