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बच्चों को परोसी जा रही बासी और फंफूदी लगी खिचड़ी

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बच्चों को परोसी जा रही बासी और फफूंदी लगी खिचड़ी
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शिकारपुर क्षेत्र के गांव भैसरोली स्थित प्राइमरी स्कूल में सामने आया मामला, जांच के आदेश
- सिलेंडर से नहीं उपले से जलाए जा रहे चूल्हे, धुआं से फैल रहा प्रदूषण
- परीषदीय स्कूल की एमडीएम की रसोई से सामान भी गायब
- जिले के अधिकतर परिषदीय स्कूलों में हो रही मनमानी
- शिकारपुर क्षेत्र के गांव भैसरोली स्थित स्कूल में प्रधान ने किया खुलासा
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। बजट के बावजूद परिषदीय स्कूलों में अध्यापक बच्चों को स्वच्छ और ताजा भोजन उपलब्ध नहीं करवा पा रहे हैं। बृहस्पतिवार को शिकारपुर क्षेत्र के गांव भैसरोली स्थित प्राइमरी स्कूल में बच्चों को बासी खाना परोसने का मामला सामने आया। प्रधान राजीव कुमार शर्मा को शिकायत मिली तो वह स्कूल पहुंचकर रसोई को चेक किया। इस दौरान एक बाल्टी में बासी और फफूंदी लगी खिचड़ी मिली। इतना ही नहीं सिलेंडर की बजाय स्कूल में उपले से चूल्हे जलाए जा रहे हैं, जिससे उठने वाले धुआं से प्रदूषण फैल रहा है। साथ ही रंगाई-पुताई में इस्तेमाल की जाने वाली गंदी बाल्टी का उपयोग खाना बनाने में जा रही है। यही नहीं एमडीएम की रसोई से सामान भी गायब है।
जिले के सभी स्कूलों में एमडीएम की रसोई है जिसमें बच्चों को खाना देने के लिए थाली, गिलास के अलावा खाना बनाने के लिए गैस सिलेंडर आदि की व्यवस्था है। इससे संबंधित विभाग को मिली 75 से अधिक शिकायतों की जांच चल रही है। ऐसा ही एक मामला बृहस्पतिवार को शिकारपुर क्षेत्र के गांव भैसरोली स्थित प्राइमरी स्कूल में सामने आया। प्रधान राजीव कुमार शर्मा को शिकायत मिली तो वह स्कूल पहुंचे और रसोई को चेक करने पर एक बाल्टी में बासी और फफूंदी लगी खिचड़ी मिली। रसोई में न तो सिलेंडर था और न ही पूरा सामान। प्रधान ने जब अध्यापकों से सवाल किए तो स्कूल में ही उपले से चूल्हा जलाकर भोजन बनाने का काम शुरू हुआ। प्रधान और बच्चों के अभिभावकों का आरोप है कि अध्यापक और रसोइया अपनी मनमानी कर रहे हैं। आरोप यह भी है कि स्कूल में तीन अध्यापक हैं और एक अध्यापक रोजाना अनुपस्थित रहता है।
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एमडीएम योजना साप्ताहिक आहार मेन्यू
- सोमवार को रोटी-सब्जी, जिसमें सोयाबीन अथवा दाल की बड़ी का प्रयोग ओर ताजा मौसमी फल।
- मंगलवार को चावल-दाल का प्रावधान है।
- बुधवार को तहरी एवं दूध का वितरण किया जाता है।
- बृहस्पतिवार को रोटी और दल का वितरण होता है।
- शुक्रवार को तहरी, जिसमें सोयाबीन की बड़ी का प्रयोग जरूरी है।
- शनिवार को चावल और सोयाबीन युक्त सब्जी बनाने का प्रावधान है।

इस तरह तैयार होना चाहिए एमडीएम
प्राथमिक स्तर और उच्च प्राथमिक स्तर के 100 बच्चों को रोजाना बनाए जाने वाले एमडीएम की मात्रा को भी मेन्यू में शामिल कर अवगत करवाया है। इसके तहत सोमवार को रोटी-सब्जी, जिसमें सोयाबीन अथवा दाल की बड़ी का प्रयोग ओर ताजा मौसमी फल शामिल है। इसके लिए प्राथमिक स्तर पर 100 बच्चों के लिए 10 किलो आटा, एक किलो सोयाबीन अथवा दाल की बड़ी, पांच किलो सब्जी और 500 ग्राम तेल या घी शामिल है। इसी तरह उच्च प्राथमिक स्तर के 100 बच्चों के लिए 15 किलो आटा, 1.5 किलो सोयाबीन या दाल की बड़ी, 7.5 किलो सब्जी और 750 ग्राम तेल या घी शामिल है।

कोट
सिलेंडर खत्म होने के कारण चूल्हा जलाना पड़ा। खिचड़ी बच गई थी और उसे रसोइया ने बाल्टी में ही छोड़ दिया था। बच्चों को समय पर एमडीएम और अन्य सुविधाएं दी जा रही है। लगाए गए आरोप गलत हैं।
- राजकिशोर, हेडमास्टर, प्राइमरी पाठशाला, भैंसरोली

मामला गंभीर है और संज्ञान में आ चुका है। पूरे मामले की जांच के आदेश क्षेत्र के एबीएसए को दे दिए हैं। जांच रिपोर्ट मिलने पर अध्यापकों और रसोेइया के खिलाफ कार्रवाई होगी।
- अजीत कुमार, बीएसए

बच्चों से एमडीएम का राशन उतरवाने वाला वीडियो वायरल
- वायरल वीडियो मिलते ही बीएसए ने बैठाई जांच
- नगर के मोहल्ला साठा स्थित परिषदीय स्कूल का है मामला
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। परिषदीय स्कूलों में बच्चों से एमडीएम का राशन उतरवाने वाला वीडियो वायरल होने से विभाग की किरकिरी हो रही है। मामला संज्ञान में आने पर बीएसए ने जांच बैठा दी है।
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व्हाट्सएप पर एक वीडियो चल रहा है। इसमें बच्चे एमडीएम का राशन उतार रहे हैं। यह वीडियो नगर के मोहल्ला साठा स्थित परिषदीय स्कूल का बताया जा रहा है। यह वीडियो विभाग के अधिकारियों के पास भी पहुंच गया है। इससे जहां विभाग की किरकिरी हुई है वहीं शिक्षकों द्वारा की जा रही मनमानी और बच्चों से लिए जा रहे काम को भी उजागर करने का काम किया है। बीएसए अजीत कुमार ने बताया कि वायरल हो रहे वीडियो की जांच के लिए नगर क्षेत्र के एबीएसए केएल वर्मा को जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। इस वीडियो में बच्चे साफ नजर नहीं आ रहे। इसलिए इसकी गहनता से जांच जरूरी है। एबीएसए को जांच में आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। यदि यह वीडियो सही पाया गया तो संबंधित विभाग के शिक्षकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
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