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अतिक्रमण से घिरा है शहीदों का स्मारक

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अतिक्रमण से घिरा है शहीद स्मारक
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- 12 सितंबर 1930 को गुलावठी में नौ देशभक्त हुए थे शहीद
देवेंद्र अग्रवाल
गुलावठी
12 सितंबर सन 1930 गुलावठी के लिए ऐतिहासिक दिन है। यह दिन शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। 12 सितंबर 1930 को पुलिस की गोलियों से क्षेत्र के नौ वीर शहीद हुए थे। इनकी याद में देश की आजादी के बाद सन 1948 में घटनास्थल पर शहीद स्मारक की स्थापना की गई थी। इस शहीद स्मारक का समय-समय पर जीर्णोद्धार होता रहा, परंतु शहीद स्मारक के दोनों ओर अतिक्रमण और गंदगी के कारण इसके सौन्दर्य को ग्रहण लग गया है।
सन 1930 में देश की आजादी का आंदोलन चरम पर था। बताया जाता है कि 12 सितंबर को गुलावठी के बड़ा महादेव मंदिर परिसर में अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध सभा की गई थी। सभा न होने देने के लिए आमादा जिला प्रशासन ने गुलावठी में एक ऐसे थानेदार को नियुक्त किया था जोकि स्वतंत्रता आंदोलनकारियों पर जुल्म ढाने के लिए कुख्यात था। सभास्थल पर लोगों को जाने से रोकने के लिए पुलिस ने कई हथकंडे अपनाए, लेकिन सभास्थल पर भारी भीड़ एकत्र हुई। इससे बौखलाए थानेदार ने सभा में भीड़ पर घोड़ा चढ़ा दिया, जिससे भगदड़ मच गई और कई लोग घायल हो गए। क्षेत्र के बुजुर्ग बताते हैं कि थानेदार की इस करतूत से ग्राम भटौना निवासी भगवान सिंह इतने उत्तेजित हुए कि उन्होंने लाठी से प्रहार कर थानेदार को मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद अन्य पुलिसकर्मी भाग खड़े हुए। घटनास्थल से लौट रहे लोगों को घेरकर पुलिस ने मुख्य मार्ग के तिराहे पर बेरहमी से लाठियां व गोलियां बरसाईं, जिसमें नौ देशभक्त शहीद हो गए। शहीदों में भगवान सिंह के अलावा भरत सिंह, मुन्नालाल, छुट्टन लाल, कन्हैयालाल, चंदूलाल, जहारिया, श्रीराम एवं नवल सिंह शामिल थे। पुलिस ने करीब चार सौ लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री बाबू बनारसीदास भी शामिल थे। इनमें से 48 लोगों पर मुकदमा चलाया गया। स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में इन देशभक्तों की गाथा गुलावठी कांड के नाम से जानी जाती है। हर साल 12 सितंबर को गुलावठी में इन शहीदों की याद में शहीद दिवस मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं स्वतंत्रता सेनानी बाबू बनारसीदास एवं मगनलाल अग्रवाल का भी आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण योगदान रहा। डीएन इंटर कॉलेज में प्रत्येक वर्ष शहीदों के वंशजों को सम्मानित किया जाता है। शहीद स्मारक के सौन्दर्यीकरण में पूर्व केंद्रीय मंत्री कुंवर चौ.जगवीर सिंह, चौ.वेदराम सिंह नागर, सांसद चौ.सुरेंद्र सिंह नागर, शिक्षाविद् बलवंत सिंह शर्मा, कांती प्रसाद गोयल, पूर्व पालिकाध्यक्ष सैय्यद सैफुद्दीन इरफान एवं मंगतराम पाल और नगरपालिका परिषद का योगदान रहा है। अब स्मारक के आसपास गंदगी और अतिक्रमण के कारण लोगों में गुस्सा है।
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शहीदों के वंशज आज होंगे सम्मानित
गुलावठी। स्थानीय डीएन इंटर कॉलेज में 12 सितंबर को शहीद हुए देशभक्तों के परिजनों को मंगलवार को सम्मानित किया जाएगा। यह जानकारी कॉलेज के प्रधानाचार्य श्यामसुंदर गुप्ता ने दी है। उन्होंने बताया कि इससे पूर्व शहीद स्मारक पर शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किए जाएंगे। ब्यूरो
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