फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बिल न देने पर अब्दुल्लाह अस्पताल में मरीज को बनाया बंधक

विज्ञापन
विज्ञापन
बिल नहीं चुकाया तो मरीज को बनाया बंधक
विज्ञापन

- कैशलेस भुगतान के बारे में पूछकर भर्ती हुआ था मरीज
- रुपये नकद न देने पर बंधक बनाने का आरोप
- डीएम के आदेश पर पूर्व में सील हो चुका है अस्पताल
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर।
नगर के दिल्ली रोड स्थित अब्दुल्लाह अस्पताल में मरीज को कथित रूप से बंधक बनाने का मामला सामने आया है। अस्पताल में भर्ती मरीज ने आरोप लगाया है कि भर्ती होने से पहले कैशलेस के लिए पूछकर भर्ती किया गया था। जबकि अब उससे कैश में भुगतान की मांग की जा रही है। भुगतान न करने पर उसे अस्पताल से बाहर नहीं निकलने दिया जा रहा है।
बरेली के हल्दीकलां, नीरगंज निवासी नरेंद्र पुत्र प्यारेलाल एक निजी फाइनेंस कंपनी में क्रेडिट ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं। नरेंद्र ने जानकारी देते हुए बताया कि गत रविवार को उसे बुखार हुआ था, जिसके बाद उसने जिला रामपुर में रक्त की जांच कराई। रिपोर्ट में मलेरिया, टायफाइड की पुष्टि हुई। नौकरी बुलंदशहर में होने के चलते उसने अपनी बीमा की कंपनी से जानकारी कर कैशलेस अस्पतालों की सूची की जानकारी की, जिसमें बताया गया कि दिल्ली रोड स्थित अब्दुल्लाह अस्पताल कैशलेस के लिए मान्य है। नरेंद्र का कहना है कि कैशलेस के बारे में अस्पताल संचालक से जानकारी करने के बाद शुक्रवार दोपहर उसे अस्पताल में भर्ती किया गया था। नरेंद्र का आरोप है कि रविवार को अस्पताल का एक चिकित्सक उसके पास पहुंचा और कैश में भुगतान करने की बात कही, जिस पर उसने कैशलेस भुगतान के बारे में बताया। नरेंद्र का आरोप है कि चिकित्सक ने भुगतान न करने पर उसके साथ मारपीट की धमकी दी। साथ ही नरेंद्र के अस्पताल से निकलने पर भी रोक लगा दी गई। इसके चलते वह न तो भुगतान के लिए कैश का इंतजाम कर सका और न ही किसी अफसर से शिकायत कर सका।
विज्ञापन


फर्जी तरीके से संचालन पर किया गया था सील
कुछ दिन पूर्व नगर के अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर भ्रूण लिंग जांच के मामले में छापामार कार्रवाई के बाद डीएम के आदेश पर अब्दुल्लाह अस्पताल की जांच की गई तो पता चला था कि अस्पताल में कोई नियमित चिकित्सक नहीं है। जबकि अस्पताल संचालक के पास भी आयुर्वेदिक डिग्री है। इसके बाद डीएम के आदेश पर सीएमओ ने अस्पताल को सील कर दिया था। हालांकि जानकारी के अनुसार शर्तें पूरी करने के बाद कुछ दिन पूर्व अस्पताल की सील खोल दी गई थी।

भुगतान के लिए मरीज को बंधक बनाने का किसी को भी अधिकार नहीं है। इस संबंध में शिकायत मिलती है तो जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. केएन तिवारी, सीएमओ
विज्ञापन


कंपनी से टाइअप समाप्त होने के चलते कैशलेस इलाज में परेशानी हो रही है। इस संबंध में मरीज से वार्ता की गई है। लगाए गए आरोप निराधार हैं। फिलहाल कोई विवाद नहीं है। - डॉ. यूनुस, संचालक, अब्दुल्लाह हॉस्पिटल
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें