‘बड़ी खेप’ के काले कारोबार से छोटे व्यापारी परेशान
- गत पांच वर्षों से फैंसिड्रिल न मिलने का लगाया आरोप
- व्यापारियों ने कहा अन्य जनपदों व प्रदेशों में होती है सप्लाई
- चिकित्सकों ने भी फैंसिड्रिल की जिले में बिक्री से किया इनकार
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर।
जिले में चल रहे फैंसिड्रिल के काले कारोबार से फुटकर मेडिकल व्यापारी परेशान हैं। व्यापारियों का कहना है कि गत पांच वर्षों से जिले में नाम मात्र के लिए फैंसिड्रिल की बिक्री की जाती है, जबकि सूत्रों के अनुसार जिले में प्रतिमाह करीब दो हजार बोतलें फैंसिड्रिल की आती है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब जिले में फैंसिड्रिल फुटकर विक्रेताओं को नहीं बेची जाती है तो ये खेप जाती कहां है।
बता दें कि नगर के एक ट्रांसपोर्ट पर कथित रूप से फैंसिड्रिल सीरप की ‘बड़ी खेप’ लाई गई थी। गोपनीय सूचना पर पुलिस व ड्रग विभाग के अफसरों ने मौके पर पहुंचकर छापा मारा। हालांकि बाद में अफसर सब ठीक है बताते हुए बिना कार्रवाई किए लौट गए। जिले में फैंसिड्रिल की खेप लगातार आने के बाद भी जो बात सामने आई वह चौंकाने वाली है। बताया जा रहा है कि प्रतिमाह करीब दो हजार बोतल फैंसिड्रिल आने के बाद भी जिले के मेडिकल स्टोरों पर मरीजों को बेचने के लिए फैंसिड्रिल नहीं मिलती है। इस कारण कई चिकित्सक इसे मरीजों को लिखते ही नहीं हैं। मेडिकल के फुटकर व्यापारियों के अनुसार जिले के अधिकतर फुटकर व्यापारियों को गत चार से पांच वर्षों से कोई फैंसिड्रिल की सप्लाई डिस्ट्रीब्यूटरों ने नहीं की। अब ऐसे में चौंकाने वाली बात है कि जब जिले में फैंसिड्रिल की बिक्री ही नहीं की जा रही है तो उसकी खेप क्यों मंगाई जा रही है और इस खेप को कहां खपाया जा रहा है।
ड्रग एसोसिएशन पदाधिकारी बोले
फैंसिड्रिल की खेप लगातार जिले में आ रही है। मेडिकल स्टोरों पर फैंसिड्रिल की उपलब्धता न होने के चलते जिले में बिक्री के आसार कम नजर आ रहे हैं। फैंसिड्रिल की खेप कहां सप्लाई की जा रही है इस संबंध में जानकारी नहीं है। - देवेश त्यागी, सचिव, बुलंदशहर केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन
गत चार-पांच वर्षों से मेडिकल के फुटकर व्यापारियों के पास फैंसिड्रिल की खेप नहीं आई है। थोक व्यापारी फैंसिड्रिल की खेप को ओवर रेटिंग के लिए अन्य देश व प्रदेशों में सप्लाई कर रहे हैं। इसकी जांच होनी चाहिए। कई व्यापारियों को इस संबंध में कोलकाता से नोटिस भी आए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है। - विकास शर्मा, मेडिकल व्यापारी, पूर्व सचिव
फुटकर व्यापारियों को फैंसिड्रिल की सप्लाई लंबे समय से नहीं दी गई है। थोक व्यापारी फैंसिड्रिल को ब्लैक करते हैं। दवाइयों का काला कारोबार करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। - ब्रिजेन्द्र कुमार गर्ग, अध्यक्ष, रिटेल केमिस्ट एसोसिएशन
चिकित्सकों का कहना
फैंसिड्रिल में कोडीन होती है। इसलिए इसका मात्रा से अधिक सेवन नुकसानदेह होता है। साथ ही यह सीरप बच्चों के विकास को भी प्रभावित करता है। जिसके चलते चिकित्सक इसे कम ही उपयोग की सलाह देते हैं। - डॉ. केएन तिवारी, सीएमओ
फैंसिड्रिल सीरप केवल स्पेशल केसों में मरीजों को दी जाती है। कोडीन युक्त होने के कारण बच्चों को इस सीरप को नहीं दिया जा सकता है। इससे बच्चों की प्रगति पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। - डॉ. संजीव अग्रवाल, फिजीशियन