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जान जोखिम में डालकर वाहनों से स्कूल जा रहे नौनिहाल

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जान जोखिम में डालकर खटारा वाहनों से स्कूल जा रहे नौनिहाल
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जिले के स्कूलों में मनमाने तरीके से खटारा वाहनों को लगाकर बच्चों के जीवन से खिलवाड़ किया जा रहा है। एआरटीओ दफ्तर के रिकॉर्ड के मुताबिक, जिले के स्कूलों ने सिर्फ 540 वाहन ही पंजीकृत हैं, जबकि स्कूलों में लगे वाहनों की संख्या दो हजार से अधिक है।

ऐसे में छोटे-छोटे बच्चे जान जोखिम में डालकर स्कूल जा रहे हैं। जिला प्रशासन इस मामले में अनजान बना है। संचालक अपने स्कूलों को जिले का सबसे बेेहतर बताते हैं, लेकिन बच्चों की सुरक्षा के नाम पर स्कूलों में मानकों का पालन नहीं किया जाता है।
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बच्चों को लाने व ले जाने के लिए लगाए जाने वाले वाहनों के संचालकों से कमीशन वसूलने के लिए संचालक बच्चों की जान जोखिम में डाल देते हैं। एआरटीओ दफ्तर से मिले आंकड़ों पर गौर करें तो सच्चाई चौंकाने वाली है।

जानकारी के अनुसार जिले में करीब 2400 छोटे-बड़े स्कूल हैं। इनमें बच्चों व स्टाफ को लाने व ले जाने के लिए वाहनों की संख्या पर गौर किया जाए तो स्थिति काफी दयनीय नजर आती है। इन स्कूलों में मात्र 540 वाहनों को ही विभाग ने अनुमति दी हुई है।

जबकि कई बड़े स्कूलों में तो 10 या 12 बसें चल रही हैं, लेकिन मौके पर 40 से भी अधिक बसों का संचालन किया जा रहा है। मानकों को ताक पर रखकर चल रहे इन वाहनों को चलाने की अनुमति न तो चालकों के पास है और न ही स्कूल संचालकों के पास।

अफसरों के रहमोकरम पर चल रहे वाहनों में सफर करने वाले मासूम बच्चों की जान को आए दिन खतरा बना रहता है। अकसर देखने में आया है कि स्कूल वाहनों को चलाने वाले चालक भी पूरी तरह से परफेक्ट नहीं होते हैं।

चालकों की लापरवाही व कम जानकारी के चलते कई बार स्कूली बच्चों की जान पर भी बन आई है। न तो एआरटीओ और न ही स्कूल संचालकों ने आज तक किसी भी चालक का परीक्षण करने की जहमत उठाई है।

80 फीसदी वाहन नहीं हैं स्कूलों के योग्य
स्कूलों में लगाए गए 80 फीसदी वाहन बच्चों को लाने व ले जाने के लिए योग्य ही नहीं है। शासन के नियमानुसार केवल मिनी बस या बस में ही बच्चों को लाया व ले जाया जा सकता है।

परंतु जिले के स्कूलों में पिकअप, मैजिक, मारूती वैन, ईको, ई-रिक्शा समेत तमाम अवैध वाहन बच्चों को लाने व ले जाने का कार्य कर रहे हैं। उक्त वाहनों के अवैध होने के बाद भी अभी तक अफसरों ने ऐसे स्कूलों के वाहनों के खिलाफ कोई कार्रवाई करने की जहमत नहीं उठाई है।

कई बार हो चुके हैं हादसे
खटारा व डग्गमार वाहनों के चलते कई बार स्कूली बच्चे हादसे का शिकार हो चुके हैं। हालांकि गनीमत रही कि इनमें किसी परिवार को कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन हादसों के बाद बच्चों व पीड़ितों के चेहरे पर दहशत साफ पर देखी गई थी।

हादसों के बाद भी जिला प्रशासन का कोई भी अफसर इस ओर कोई सख्त कदम नहीं उठा सका। बल्कि अभिभावकों की शिकायतों के बाद भी अफसरों ने एक-दूसरे अधिकारी पर टालकर अपना पलड़ा झाड़ लिया।
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स्कूल-कॉलेजों में अवैध रूप से चल रहे वाहनों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जाती रही है। जिसमें एक दर्जन से अधिक वाहनों के खिलाफ सील तथा अन्य के खिलाफ जुर्माना करने की कार्रवाई की गई है। आगे भी कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। - सुरेंद्र सिंह, एआरटीओ प्रशासन
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