दो बार मौत से जीती जंग, तीसरी बार में हारे मौज्जम
बुलंदशहर। पूर्व प्रधान और बैनामा लेखक मौज्जम अली खां की मौत पूर्व में भी उन्हें दो बार छू कर निकल चुकी थी। दोनों बार उन्होंने मौत को मात दी थी, लेकिन इस बार मौज्जम मौत से हार गए। ताबड़तोड़ गोलियों के वार से बदमाशों ने उन्हें मौत के घाट उतार दिया। मौज्जम की हत्या के मामले में कई बिंदु सामने आ रहे हैं। पुलिस भी विभिन्न पहलुओं पर जांच कर रही है। हालांकि, अभी तक हत्यारोपियों का सुराग नहीं लग सका है।
मौज्जम अली खां पर वर्ष 2010-11 में भी कुछ बदमाशों ने जानलेवा हमला किया था। उस दौरान गोली लगने से गंभीर रुप से घायल हुए मौज्ज्म ने मौत को मात देकर जिंदगी पाई थी। इसके बाद सबकुछ ठीक चल रहा था। बकौल पुलिस करीब तीन वर्ष पूर्व मौज्जम खां ने खुर्जा नगर के मोहल्ला मदार दरवाजा निवासी शमशेख कमर पुत्र इशाक को शादी के लिए चार लाख रुपये उधार दिए थे, जिन्हें मौज्जम तय समय बीतने के बाद शमशेख से वापस मांग रहे थे। लेकिन शमशेख ने रुपये न देकर मौज्जम पर अप्रैल 2017 में जानलेवा हमला कर दिया था। जिसमें एक गोली मौज्जम के हाथ में भी लगी थी। पुलिस ने मामले में शमशेख व अन्य आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। उक्त घटना के बाद से आरोपी शमशेख मामले में फैसले का दबाव बना रहा था। आरोप है कि तीन दिन पूर्व भी आरोपी शमशेख ने मौज्जम के भतीजे को मुकदमा वापस न लेने पर हत्या की धमकी दी थी। परिजनों का आरोप है कि आरोपी शादाब, शानू, नदीम और असनान ने मौज्जम की गोली मारकर हत्या की है।
प्रारंभिक जांच में हत्या रुपयों के लेनदेन को लेकर होना सामने आ रहा है। मामले की गंभीरता से व विभिन्न पहलुओं पर जांच की जा रही है। जल्द ही वारदात का खुलासा कर दिया जाएगा। - एन कोलांचि, एसएसपी