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गांव इछावरी में एक माह में 11 लोगों ने तोड़ा दम

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गांव इछावरी में एक माह में 11 लोगों ने तोड़ा दम
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डिबाई। क्षेत्र का गांव इछावरी यूं तो सीएचसी से मात्र तीन किमी की दूरी पर है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की अधूरी टीम के कारण यहां के लोगों को पर्याप्त इलाज नहीं मिल रहा है। हालात यह हैं बुखार-खांसी की समस्या के बाद एक माह में 11 लोगों की मौत हो गई। ग्रामीणों के मुताबिक यह संख्या इससे भी अधिक है। हालात यह हैं कि सीएचसी पर एक ही चिकित्सक को लोगों के उपचार करने और गांवों में कैंप लगाने की भी जिम्मेदारी दी गई है।
गांव इछावरी के लोगों में इस समय भय का माहौल है। कारण है कि महामारी के इस दौर में गांव में पिछले एक माह में 11 लोगों की मौत अभी तक हो चुकी है। लोगों के भय का कारण है कि पहले लोगों को बुखार आता है, उसके तीन से चार दिन बाद उनकी अचानक तबीयत और खराब होती है और उनकी मौत हो जाती है। अब स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में कैंप लगाने की योजना बनाने का दावा तो किया है, लेकिन वह अभी तक धरातल पर नहीं उतर सकी है। जिसके चलते ग्रामीणों को जांच के लिए कैंप लगने का अभी भी इंतजार है।
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यह हैं अव्यवस्थाएं
- इछावरी गांव में अभी तक नहीं पहुंची जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम
- सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर 30 बेड की सुविधा
- स्वास्थ्य केंद्र पर दस ऑक्सीजन के सिलिंडर
- चिकित्सा प्रभारी समेत दो पुरुष और एक महिला चिकित्सक
- अस्पताल में तीन फर्मासिस्ट की तैनाती
- अस्पताल में साफ-सफाई के लिए स्वीपर की भी तैनाती नहीं
- सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ, पैथोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट के पद खाली पड़े हैं
- देख- रेख के बिना विधायक निधि से मिली एंबुलेंस धूल फांक रही
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क्या बोले लोग
लोगों को अपनी जिम्मेदारी निभाने के साथ ही सरकारी मशीनरी, ग्राम प्रधान को भी अपना सहयोग करना होगा। गांव में बीमार होने वाले प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जांच कराने के लिए आगे आना होगा। आइसोलेशन वार्ड बनाने या दावा करने के बजाए स्टाफ को बढ़ाकर लोगों को उपचार की ओर ध्यान देना चाहिए।
सावित्री देवी
ऐसी महामारी जीवन में नहीं देखी है। लोगों के स्वास्थ्य के लिए प्रतिदिन घर पर हवन कर रहे हैं। इससे वातावरण शुद्ध होता है और हवन के धुएं से कीट-पतंगों व वायरस का विनाश होता है। स्वास्थ्य विभाग को भी बीमार लोगों के उपचार के लिए ध्यान देने की जरूरत है।
गंगा प्रसाद निराला
अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं शुरू होनी चाहिए, क्योंकि अस्पतालों में लोग मजबूरी में ही जाते हैं। ओपीडी सेवाएं चालू न होने से बड़ी संख्या में लोग घर से बाहर उपचार कराने के लिए नहीं निकल रहे हैं। ऐसे में महामारी रुकने के बजाए और बढ़ेगी।
रूप किशोर बघेल
इन गांवों के हालात भी हैं खराब -
गांव का नाम मौत
कुंवरपुर 07
राजौर 09
कैलावन 18
परवाना 17
कनौना 14
दौलतपुर कलाँ 18
बरहाना 07
इन लोगों की हुई है मौत
कस्तूरी देवी
दुर्गा देवी
डोरी लाल
अंतराम
कठोरी देवी
शांति देवी
मुकेश
हरप्यारी
अनोखे लाल
हजारी लाल
किशोरी
क्षेत्र में कोविड मरीजों के लिए एक 100 बेड का अस्पताल चालू कराया गया है। लगातार उच्चाधिकारियों से वार्ता करते हुए लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने की ओर कदम बढ़ाया जा रहा है। अस्पतालों में स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए शासन को पत्र लिखा है। ऑक्सीजन प्लांट लगवाने के लिए प्रयास किया जा रहा है।
डा. अनीता लोधी, विधायक डिबाई
फिलहाल सीएचसी पर मैं अकेला चिकित्सक हूं। दूसरे चिकित्सक की 100 बेड के अस्पताल में ड्यूटी लगी है। मुझे कोविड कैंप के लिए भी जाना पड़ रहा है। जिससे स्टाफ की कमी से काफी परेशानी हो रही है। स्टाफ की कमी को लेकर उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
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डा. हेमंत गिरी, सीएचसी प्रभारी
गांव को एक बार सैनिटाइज कराया जा चुका है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को गांव में लोगों की जांच कराने के लिए भी पत्र लिखा है। क्षेत्रीय विधायक को भी गांव में फैल रही बीमारी से अवगत कराया है। लोगों को सुविधाएं दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है।
महिमा सिंह, ग्राम प्रधान
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