जनपनद की जहरीली हवा लोगों की सेहत को बिगाड़ रही है। प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की रिपोर्ट के हिसाब से खुर्जा क्षेत्र में हवा सांस लेने लायक नहीं है। हवा में घुले जहरीले रसायन फेफड़ों के सहारे शरीर में पहुंचते हैं। वायु प्रदूषण फैलाने वाली सौ फैक्ट्रियों को प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने पिछले सप्ताह नोटिस जारी किया है।
फेफड़ों तक पहुंचने वाली हवा में औसतन कण 100 माइक्रोग्राम प्रति मिनट से अधिक नहीं होने चाहिए। मगर खुर्जा की हवा में इन हानिकारक कणों की मात्रा सामान्य से अधिक है। खुर्जा की हवा में विद्यमान हानिकारक कणों की मात्रा 100 के सापेक्ष 157 माइक्रोग्राम और 172 माइक्रोग्राम पहुंच गई है।
प्रदूषित हवा से लोग समय से पहले थककर हांफ रहे हैं। बता दें कि हवा के द्वारा नाक में जाने वाले कणों का आकार औसतन 10 माइक्रोग्राम होता है। खुश करने वाली बात यह है कि हवा में नाइट्रोजन-डाई-आक्साइड और सल्फर-डाई-आक्साइड की मात्रा खतरनाक बिंदु से कम है।
नाइट्रोजन-डाई-आक्साइड की मात्रा 21-22 माइक्रोग्राम और सल्फर-डाई-आक्साइड की मात्रा 22 और 20 माइक्रोग्रामी निकली है। यह मात्रा अधिकतम 80 माइक्रोग्राम होनी चाहिए। वहीं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने हवा की सेहत बिगाड़ने वाले 100 यूनिटस को नोटिस भेज जवाब मांगा है।
बता दें कि लोकसभा में प्रदूषित हवा का मुद्दा उठाया गया था। बुलंदशहर के प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी ने लोकसभा को जनपद में हवा का स्टेटस भेज दिया है। प्रदूषण की रिपोर्ट के साथ कार्रवाई की जानकारी भी दी गई है।
खुर्जा की मीट फैक्ट्रियों में प्रदूषण की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जाएगी। इसके लिए फैक्ट्री प्रबंधन को मीट प्लांट्स में ऑनलाइन सिस्टम सैट कर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सर्वर से कनेक्ट करना होगा। कनेक्टिविटी के बाद अफसर मीट फैक्ट्रियों में प्रदूषण का ऑनलाइन हाल जान पाएंगे।
खुर्जा की हवा में हानिकारक कणों की अधिकता पाई गई है। हवा में औसतन कण 100 माइक्रोग्राम प्रति मिनट से अधिक नहीं होने चाहिए। हालिया रिपोर्ट में हानिकारक कण 170 तक पाए गए हैं।-जीएस श्रीवास्तव, प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी
प्रदूषित हवा की अधिकता से फेफड़ों को सीधा नुकसान पहुंचता है। प्रदूषित हवा का पीरियड अधिक हो जाता है तो फेफड़ों का कैंसर भी बन जाता है। प्रदूषित हवा स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। - डा. दीपक ओहरी, सीएमओ, बुलंदशहर