बजट ने गाजियाबाद में 10 हजार से अधिक सस्ते फ्लैटों के निर्माण की राह खोल दी है। सस्ते मकान बनाने वाले बिल्डरों को इनकम टैक्स में 100 फीसदी छूट का प्रावधान इन फ्लैटों के निर्माण में तेजी लाएगा।
अभी तक लागत न निकल पाने का दुखड़ा सुनाते हुए बिल्डर इन मकानों के निर्माण में हीलाहवाली बरत रहे हैं। एनसीआर, बुलंदशहर, हापुड़ समेत पूरे प्रदेश की यही स्थिति है।
प्रदेश में इन छूट का सबसे बड़ा फायदा सपा सरकार की समाजवादी आवास योजना को मिलेगा। छूट की दोनों की श्रेणियों में इस योजना का लाभ मिल रहा है। जीडीए की फ्लैटों की डिमांड बढ़ेगी। नए वित्तीय वर्ष से गाजियाबाद, एनसीआर समेत प्रदेश भर में सस्ते मकानों के निर्माण में तेजी आने की उम्मीद है।
प्रदेश सरकार ने सभी बिल्डर प्रोजेक्ट में 10 फीसदी ईडब्लूएस और 10 फीसदी एलआईजी बनाना अनिवार्य किया है। इनकी कीमत अन्य श्रेणी के मकानों पर क्रास सब्सडाइज करके ली जानी है।
पहले से ही मंदी की मार झेल रहे रीयल एस्टेट में फ्लैटों की कीमतों के बढ़ाने की गुंजाइश नहीं रही। फायदे का सौदा न जानकर बिल्डरों ने इन फ्लैटों का निर्माण ही नहीं किया है।
गाजियाबाद में पांच हजार फ्लैट अधबने पड़े हैं तो हजारों का काम नहीं शुरू हुआ है। जीडीए के नोटिस के बावजूद बिल्डर ऐसे फ्लैट नहीं बना रहे हैं।
एसजी एस्टेट्स के निदेशक गौरव गुप्त ने बताया कि केंद्र सरकार के 2022 तक सबको घर देने की दिशा में यह ठोस कदम है। एनसीआर में ही करीब 40 से 50 लाख घरों की जरूरत है। 100 फीसदी इनकम टैक्स छूट डेवलपर्स को सस्ते मकान बनाने के लिए प्रोत्साहित करेगी।
समाजवादी आवास योजना को पंख
प्रदेश सरकार की समाजवादी आवास योजना के फ्लैटों की कीमत करीब 30 लाख तक है। इस पर वर्तमान में सर्विस टैक्स करीब एक लाख रुपये होता है।
अब इसके आवंटियों को इससे छूट मिलेगी। अभी तक योजना की कीमत में सर्विस टैक्स अतिरिक्त लिया जाता था। एसवीपी ग्रुप के सीओओ अंकुर जिंदल के मुताबिक फ्लैटों पर सर्विस टैक्स की छूट घर खरीदने वालों को आर्थिक राहत देगी।
सस्ते मकान बनाने पर बिल्डरों को 100 फीसदी आयकर छूट उन्हें इस स्कीम के घर बनाने के लिए प्रेरित करेगी।
शान-ओ-शौकत पर टीसीएस का साया
शादी समारोह में तड़क-भड़क दिखाने, शान-ओ-शौकत भरी जीवनशैली के लिए खरीदे गए उत्पाद या सेवाओं पर भी अब टैक्स चुकाना पड़ेगा।
वित्त मंत्री ने इस बार के बजट में दो लाख रुपये तक के नगद भुगतान पर टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (टीसीएस) लागू कर दिया है। ऐसे सभी उपभोक्ताओं को एक फीसदी टीसीएस चुकाना पड़ेगा।
अभी तक यह टैक्स अमूमन कारों की खरीद पर लागू होता था। विशेषज्ञों की मानें तो मोदी सरकार की ब्लैकमनी पर अंकुश लगाने की यह एक और कवायद है।