बदायूं। शहर से लेकर ग्रामीण अंचल तक दूधिया किस तरह दूध का दाम ग्राहकों से वसूल कर पानी पिला रहे हैं, इसका खुलासा खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रसाशन (एफएसडीए) की रिपोर्ट में हुआ। वर्ष 2022-23 में टीम ने अलग-अलग इलाकों से दूध के 169 नमूने लिए थे, इनमें से 85 नमूने फेल आए हैं। इन नमूनों में 90 प्रतिशत दूध में पानी मिलने की बात सामने आई। जबकि 10 प्रतिशत दूध ग्लूकोज आदि से बनाया गया था।यह प्रकरण एडीएम कोर्ट में विचाराधीन हैं।
गर्मी हो या सर्दी हम लोग दूूध को लेकर अधिकांशता दूधिया पर निर्भर होते हैं। इसकी मुख्य वजह मोहल्ला, कालोनियों के आसपास कोई डेयरी न होना है। इसका दूधिया जमकर फायदा उठा रहे हैं। हालात ये है कि एक तो वह दूध घर पर पहुंचाने के नाम पर मुंह मांगा दाम लेते हैं। साथ ही शुद्ध दूध के पैसे लेकर लोगों को पानी मिलाकर दूध पहुंचाते हैं।
यह बात हम नहीं कर रहे हैं, बल्कि एफएसडीए की रिपोर्ट के मुताबिक जिले में दूधियों ने हाल बेहाल कर दिया है। विभाग के मुताबिक वर्ष 2022-23 में टीम में 169 नमूने दूूध के लिए थे। इनकी जांच लैब के माध्यम से कराई गई। पिछले दिनों विभाग को लैब की रिपोर्ट मिली। इसके अनुसार 169 नमूनों में से 85 नमूने फेल आए।
पिछली वित्तीय वर्ष में दूध के 169 नमूने लिए थे। इनकी रिपोर्ट प्राप्त हुई है। इनमें 85 नमूने फेल आए हैं। इनमें से 90 प्रतिशत नमूनों में पानी की मिलावट की गई थी।
-चंद्र शेखर मिश्रा, सहायक आयुक्त (खाद्य द्वितीय)