बदायूं। करीब 12 साल पहले वित्तीय समावेशन के लिए जनधन योजना की शुरुआत होने के बाद से अब तक महिलाएं खाता खुलवाने में अव्वल रही हैं। जिले में मार्च, 2021 में जहां 7,09,005 महिलाओं के जनधन खाते थे, जून 2026 तक यह संख्या बढ़कर 10,30,939 हो गई है। पांच साल में महिला खाताधारकों की संख्या में 3,21,934 की बढ़ोतरी हुई है।
जिले में योजना शुरू होने के बाद महिलाओं ने बढ़चढ़कर खाते खुलवाए थे। इस कारण वह प्रत्येक वर्ष में अव्वल रही। योजना शुरू होने से मार्च 2021 तक 1311982 कुल खाते खोले गए थे। इनमें 602977 पुरुषों ने और 709005 महिलाओं ने खाते खुलवाए थे। 2021 तक पुरुषों से महिलाओं ने 106028 अधिक खाते खुलवाए। एलडीएम रितेश कुमार वर्मा ने बताया कि जून 2026 तक जिले में 1951351 खाते खोले जा चुके हैं। इसमें 920412 खाते पुरुषों ने खुलवाए व 1030939 खाते महिलाओं ने खुलवाए। एलडीएम के अनुसार प्रत्येक वित्तीय वर्षों में जिले में महिलाएं पुरुषों से खाते खुलवाने में अव्वल रही हैं। जून तक जिले में 110527 तक महिलाओं ने पुरुषों से अधिक खाते खुलवाए गए हैं।
डीबीटी ने बढ़ाई खाते की जरूरत
बैंक अधिकारियों के मुताबिक जनधन खाते बढ़ने की बड़ी वजह सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे बैंक खाते में पहुंचना है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना में गैस सब्सिडी, विभिन्न पेंशन योजनाओं, छात्रवृत्ति, मनरेगा मजदूरी और अन्य प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के लिए बैंक खाता जरूरी होता है। कई सरकारी योजनाओं में लाभार्थियों के खाते में राशि सीधे भेजी जाती है। इससे परिवारों में महिलाओं के नाम पर बैंक खाता खुलवाने की जरूरत बढ़ी है। संवाद
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बैंक सखी से लेकर सीएससी केंद्रों पर खोले जा रहे खाते
जनधन खाता खुलवाने की प्रक्रिया भी सामान्य बैंक खाते की तुलना में काफी सुलभ है। बैंक शाखाओं के साथ बैंकिंग प्रतिनिधियों और ग्राहक सेवा केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में भी खाता खोलने की सुविधा मिलने से लोगों को बैंक तक पहुंचने में आसानी हुई है। इसके बैंक सखियां की ओर से घर-घर जाकर महिलाओं के खाते खोले जा रहे है। साथ बीसी सखी, सीएससी केंद्रों पर भी महिलाओं के खाते खोले जा रहे हैं।
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प्रतिवर्ष औसत एक लाख से अधिक महिलाओं और पुरुषों की ओर से जनधन खाता खुलवाया जाता है, महिलाओं के लिए तरह-तरह योजनाएं संचालित हो रही है, जिसके लिए खातों की जरूरत पड़ रही है। इसलिए जिले में महिलाओं की भागीदारी अधिक है।
-रितेश कुमार वर्मा, अग्रणी जिला प्रबंधक