बदायूं। जिले में महिलाओं की वाहन खरीद में तो रूचि लगातार बढ़ रही है, लेकिन उसके अनुपात में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की संख्या काफी कम है। परिवहन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि बीते नौ माह में जिले में 1060 महिलाओं ने दोपहिया और चारपहिया वाहन खरीदे, जबकि ड्राइविंग लाइसेंस केवल 375 महिलाओं ने ही बनवाया।
वर्ष 2024 में 425 महिलाओं ने ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया था। इस साल महिलाओं ने वाहनों की खरीद की, लेकिन ड्राइविंग लाइसेंस के मामले में उनकी सक्रियता अपेक्षाकृत धीमी रही है। परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वाहन खरीदी और ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के बीच का यह अंतर कई कारणों से हो सकता है।
कई महिलाएं वाहन अपने नाम पर तो खरीद रही हैं, लेकिन उसका इस्तेमाल परिवार के अन्य सदस्य करते हैं। कुछ महिलाएं स्वयं ड्राइविंग करने से झिझकती हैं और अब भी चालक या परिवार के पुरुष सदस्यों पर निर्भर रहती हैं। वहीं, एक बड़ा वर्ग अभी भी नियम-कानून और प्रक्रियागत जटिलताओं के चलते ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने से बच रहा है। हालांकि, महिला सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के नजरिए से विशेषज्ञ मानते हैं कि महिलाओं का ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना बेहद जरूरी है। ड्राइविंग लाइसेंस न केवल कानूनी अनिवार्यता है, बल्कि यह महिलाओं को स्वतंत्र और आत्मनिर्भर भी बनाता है।
महिलाओं से डीएल बनवाने की अपील
परिवहन विभाग ने अपील की है कि महिलाएं जब भी वाहन खरीदें, तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस जरूर बनवाएं। अब ऑनलाइन माध्यम से लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया सरल की गई है। एआरटीओ प्रशासन रामबचन गुप्ता का कहना है कि ड्राइविंग लाइसेंस आसानी से बनता है। ऐसे में वाहन चलाने वाले हर किसी को लाइसेंस जरूर बनवाना चाहिए।