त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के पहले चरण के मतदान में शुक्रवार को ज्यादातर बूथों पर महिलाओं की खासी भीड़ नजर आई। बूथों पर लंबी लाइन के बाद भी महिलाएं वोट डालने के लिए डटी रहीं। उनके अंदर गजब का उत्साह नजर आया।
खासकर सहसवान, इस्लामनगर और दहगवां ब्लाक क्षेत्र के पोलिंग बूथों पर सुबह से महिलाओं की भीड़ लगने लगी। उन्होंने वोट डालने के लिए लंबी लाइन में खड़े रहकर इंतजार भी किया। ऐसी कोई लाइन नहीं दिखी जिसमें महिलाओं की संख्या कम हो। एक बूथ पर लाइन में खड़ी राजवती ने बताया कि सवाल इलाके के विकास का है, तो इलाके का भविष्य तय करने में वंचित क्यों रहें। मतदान का प्रतिशत भी महिलाओं की वजह से पूर्वाह्न से ही बढने लगा।
ज्यादातर महिलाओं ने लोकतंत्र के त्योहार में हिस्सा लेने के बाद ही घरेलू कार्य पूरे किए। यहां तक उन्होंने खाना भी वोट डालने के बाद ही पकाया। पंचायत चुनाव में प्रमुख राजनीतिक दलों में भाजपा, कांग्रेस, बसपा और सपा में किसी ने भी चुनाव दलीय आधार पर नहीं लड़ा है लेकिन समर्थित प्रत्याशियों की संख्या अधिक होने के बाद भी महिलाओं ने प्रत्याशियों की हैसियत और उनके व्यवहार को वरीयता प्रदान करते हुए वोट किया। इसका नमूना प्रत्याशियों के बिस्तरों पर देखने को मिला।
रुकावट नहीं बना उम्र का अंतिम पड़ाव
बदायूं। वोट के प्रति महिलाओं में उत्साह का नतीजा रहा कि अस्सी प्लस की महिलाएं बूथों पर पहुंचीं। उन्हें सहारे की जरुरत थी लेकिन उत्साह ने सहारा भी पीछे छोड़ दिया। वैसे, घरों से उन्हें बूथ तक पहुंचाने के लिए कुछेक इलाकों में प्रत्याशियों ने बंदोबस्त किया था लेकिन बूथों से पहले ही वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित होने की वजह से उन्हें पैदल ही जाना पड़ा।
चिकचिक न फसाद, शांत माहौल में पड़े वोट
बदायूं। पंचायत चुनाव के पहले चरण में पुलिस और प्रशासनिक स्तर से किए गए इंतजाम फायदेमंद साबित हुए। अति संवेदनशील बूथों पर वोटिंग वीडियो कैमरों की निगरानी में हुई लेकिन सबकुछ शांतिपूर्ण तरीके से निपट गया। चिकचिक और फसाद तो अपवाद के रूप में भी सामने नहीं आया।
ब्लॉक क्षेत्र सहसवान, इस्लामनगर और दहगवां में पहले चरण के पुलिस और प्रशासनिक स्तर से जो इंतजाम किए गए, उसके तहत संबंधित थानों की पुलिस ने पहले से ही खास रणनीति तैयार कर ली थी। ज्ययादातर लोगों को मुचलके पर पाबंद करने के साथ गुंडा एक्ट के तहत भी कार्रवाई की थी। सूत्रों की मानें तो पुलिस ने चुनाव से पहले ही ऐलान कर दिया था कि अति संवेदनशील श्रेणी के बूथों पर मतदान की वीडियोग्राफी कराई जाएगी। इसका भी पुलिस को फायदा मिला।
पहले चरण में जिन तीन ब्लॉक क्षेत्रों में मतदान हुआ, उनमें ऐसा कोई भी नहीं जो चुनाव के दौरान नोकझोंक और मारपीट के लिए बदनाम न रहा हो। जाति विशेष वाहुल्य इलाकों में भी शांति का माहौल दिखा। चुनाव में सबकुछ सामान्य रहने के बारे में पोलिंग कर्मियों की मानें तो इसकी एक वजह देहात में भी शिक्षा की अलख रही। वोटर भी समझ चुका है कि मतदान के दौरान झगड़ा-फसाद का खामियाजा उन्हें चुनाव के बाद भुगतना पड़ता है। मदद का ढिढोरा पीटने वाले भी उस वक्त सामने नहीं आते।
निर्विरोध क्षेत्र पंचायत सदस्यों को सौंपे प्रमाण पत्र
उझानी (बदायूं)। ब्लॉक क्षेत्र से निर्विरोध चुने गए क्षेत्र पंचायत सदस्यों के लिए बीडीओ प्रतिपाल सिंह ने प्रमाण पत्र भेंट किए।
क्षेत्र पंचायत सदस्य पद के लिए हरवंश पहलवान, उनकी पत्नी मंजूदेवी, विपिन तोमर और सुशील कुमार के विरोध में किसी ने भी पर्चा दाखिल नहीं किया था। नामाकंन प्रक्रिया के दौरान ही उनका चुना जाना तय हो गया था लेकिन उस वक्त औपचारिक घोषणा नहीं की गई थी।
बीडीओ (पीसीएस अधिकारी) प्रतिपाल ने सिंह ने बताया कि निर्विरोध चुने गए हरवंश पहलवान समेत चारों क्षेत्र पंचायत सदस्यों को प्रमाण पत्र भेंट कर दिए गए। श्री सिंह ने ही उन्हें प्रमाण पत्र सौंपे। बाद में उनके समर्थकों ने मिठाई बांट कर खुशी का इजहार भी किया।