पग चिह्नों को लेकर भ्रमित हो रहे ग्रामीण
गांव बितरोई के ग्रामीणों ने भेड़ों की बाड़े के पास जिस हिंसक जानवर के पग चिह्न दिखाए हैं, वे उसे तेंदुआ के पग चिह्न मान रहे हैं। लेकिन वन विभाग की टीम ने इसे कुत्ते की नस्ल में किसी जंगली जानवर के बताए हैं। ग्रामीणों को कहना है कि वैसे तो भेड़ बकरियों का शिकार लोमड़ी, भेड़िया भी कर लेते हैं लेकिन बाड़े की दीवार जितनी ऊंची है, उसे देखते हुए नहीं लगता कि इस तरह के जानवर बाड़े की इतनी ऊंची दीवार फांदकर बाड़े में घुस सकते हैं। इसलिए ग्रामीण तेंदुआ होने की आशंका ही जता रहे हैं।
इस क्षेत्र में वन विभाग के घेरे से छूटकर भाग गया था तेंदुआ
गांव के लोगों ने बताया कि करीब नौ वर्ष पूर्व बितराई गांव से दक्षिण में एक किमी दूर स्थित सिकंद्राबाद गांव में तेंदुआ आ गया था। जिसने एक बालक को घायल कर दिया था और वह खेतों में एक कुंए में गिर गया था। गांव वालों ने कुंए पर चारपाई डाल कर उसे निकलने नहीं दिया। वन विभाग की टीम पहुंची, उसने सीढ़ी डाली थी। उससे वह निकल भागा, जो अबतक हत्थे नहीं चढ़ा। इसी प्रकार वजीरगंज क्षेत्र के रोटा में भी अज्ञात जंगली जानवरों ने 40 भेड़ों को मार डाला था। उसके बारे में भी पता नहीं लग सका कि कौन से जानवर ने उन्हें मारा है।
वन विभाग के एसडीओ जगन्नाथ ने कहा कि विभाग की टीम ने बितरोई में दौरा किया है। जानवर के पैरों के निशान देखे हैं। भेड़िया जैसे जानवर का हो सकता है।