बदायूं। डीएम के निर्देश के बाद भी जिले में चल रहे बिना लाइसेंस अस्पतालों और झोलाझाप पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है। लगातार बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे अस्पतालों में मरीजों की जान जा रही है लेकिन स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई करने से कतरा रहा है। यही नहीं कार्रवाई होने के बाद अब कुछ अस्पताल संचालकों ने तो ठिकाना बदलकर अवैध अस्पतालों का संचालन शुरू कर दिया है। बावजूद इसके जिम्मेदार खामोश हैं।
जहां एक ओर अवैध अस्पतालों के संचालकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही है तो इनमें कुछ अस्पतालों के संचालकों का नया खेल भी उजागर हुआ है। अब यह कार्रवाई होने के बाद नाम और ठिकाना बदलकर अस्पतालों को संचालित कर रहे हैं। बिल्सी रोड, वजीरगंज में तीन अक्तूबर को न्यू बदायूं अस्पताल के नाम से संचालित अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत हुई थी।
अस्पताल का फर्जी रजिस्ट्रेशन मिलने पर संचालक के खिलाफ थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस ने संचालक के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट भी दाखिल की लेकिन अब स्वास्थ्य विभाग की सांठगांठ से संचालक अन्य कस्बे में अस्पताल चला रहा है।
इसी प्रकार शहर के लालपुल स्थित न्यू फैमिली नर्सिंग होम में 21 दिन की बच्ची की मौत होने के बाद पहले तो स्वास्थ्य विभाग ने कोई ध्यान नहीं दिया। जब संचालक के खिलाफ कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज हुई तो स्वास्थ्य विभाग ने फजीहत से बचने के लिए संचालक को नोटिस थमा दिया। जांच में रजिस्ट्रेशन बाहर के डॉक्टर के नाम का मिला। इसके बाद भी रजिस्ट्रेशन निरस्त कर अस्पताल को सील नहीं किया गया। आज भी बिना रजिस्ट्रेशन के अस्पताल चल रहा है। -
कई स्थानों पर चल रहे हैं अवैध अस्पताल
जिले में बिल्सी, बिसौली, फैजगंज, इस्लामनगर, कादरचौक, अलापुर, बिनावर, कुंवरगांव, बगरैन, वजीरगंज, सैदपुर समेत ग्रामीण इलाकों में कई अवैध अस्पताल संचालित हो रहे हैं लेकिन एक-दो को छोड़कर स्वास्थ्य विभाग ने किसी भी अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई नहीं की है।
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जिले में संचालित सभी अस्पतालों को चिह्नित किया जा रहा है। देखा जा रहा है कि इनमें कितनों का पंजीकरण है। पंजीकरण है भी तो क्या वही चिकित्सक अस्पताल में बैठ रहे हैं या फिर उनके नाम पर कोई अन्य तो इलाज नहीं कर रहा है। जल्द ही अवैध रूप से संचालित अस्पतालों के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा।
- डॉ. तहसीन, एसीएमओ
वजीरगंज में कार्यवाही के बाद बंद पड़ा न्यू बदायूं नर्सिग होम। संवाद