आलू में पिछेती झुलसा से हो सकता है नुकसान, सब्जी की फसलों को भी हानि संभव
बदायूं। वर्तमान मौसम जहां गेहूं की फसल के लिए मुफीद है तो वहीं आलू समेत सब्जी की फसलों के लिए काफी नुकसानदायक है। सरसों में भी इस समय माहू लगने का खतरा है।
खेती के जानकारों के अनुसार, आलू में कोहरा और पाले में झुलसा नामक रोग लगता है। झुलसा रोग भी दो प्रकार का होता है- अगेती झुलसा और पछेती झुलसा। अगेती झुलसा आमतौर पर दिसंबर की शुरुआत में लगता है, जबकि पिछेती झुलसा दिसंबर के अंत से जनवरी की शुरुआत में लग सकता है। इस समय आलू की फसल में पछेती झुलसा रोग लग रहा है।
मौसम की मार से फसल प्रभावित हो रही है। इसमें पत्तियां किनारे और सिरे से झुलसना प्रारंभ होती हैं, जिसके कारण पूरा पौधा झुलस जाता है। पौधों के ऊपर काले-काले चकत्ते दिखाई देते हैं जो बाद में बढ़ जाते हैं। धीरे-धीरे जमीन के नीचे का आलू भी सड़ना शुरू हो जाता है।
कृषि विज्ञान केंद्र, उझानी के प्रभारी व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. संजय कुमार बताते हैं कि इस मौसम की मार सब्जी की फसलों पर भी हो रही है। मिर्च, शिमला मिर्च, टमाटर, गोभी आदि के लिए यह मौसम अनुकूल नहीं है। ज्यादा सर्दी सब्जी की फसलों को नुकसान पहुंचा रही है। इसके अलावा आलू में पिछेती झुलसा रोग लग रहा है। सरसों पर माहू भी इसी मौसम में लगता है।
मौसम सताए तो ये करें उपाय
डॉ. संजय कुमार के अनुसार, इस समय सब्जी की फसलों की सुरक्षा के लिए किसान दो सौ ग्राम गंधक सौ लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। आलू के झुलसा के लिए मेटालेक्सिल आठ प्रतिशत व मेनकोजैब 64 प्रतिशत का मिश्रण दो सौ ग्राम पानी में छह सौ ग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़कें। इसके अलावा साइमोक्सिलिन आठ प्रतिशत और मेनकोजैब 64 प्रतिशत के मिश्रण का भी प्रयोग कर सकते हैं। गंधक के बारे में बताया कि इसे गेहूं और सब्जी की फसलों में प्रयोग किया जा सकता है। गंधक पौधों में गर्मी लाता है और उसका तापमान नियंत्रित करके बीमारियों से बचाता है।