पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी का कहर मैदानी क्षेत्र में जारी है। नए साल से मौसम में अचानक तेजी से हुए बदलाव के बाद गलन कम होने का नाम नहीं ले रही। ठंड से कांपने को लोग मजबूर हैं। सुबह होते ही सड़कें धुंध भरे कोहरे के आगोश में समा जाती हैं। गुरुवार को अधिकतम तापमान 18.0 डिग्री और न्यूनतम तापमान 5.0 सेल्सियस दर्ज किया गया। दोपहर में सूर्य देवता के दर्शन भी हुए, लेकिन गलन से राहत नहीं मिली। सर्दी का कहर बेबस और गरीब वर्ग के लोगों पर ज्यादा पड़ रहा है। वहीं अलाव की उचित व्यवस्था नहीं होने पर जेब ढीली कर चौराहों पर लोगों को अलाव की व्यवस्था करनी पड़ रही हैं।
गुरुवार सुबह से ही मौसम में रोजाना की तरह गलन बरकरार थी। गर्म कपड़े पहनने के बाद भी लोगों को ठंड से राहत नहीं मिली। घने कोहरे के बीच घर से बाहर निकलना लोगों के लिए मुश्किल रहा। बाइक और रिक्शा चालकों का आलम यह था कि गर्म कपड़ों के साथ हाथ में दस्ताने पहनने के बाद भी वह ठंड से ठिठुरते दिखे। चंद कदम की दूरी तय करने में बाइक सवारों के हाथ ठंड से जाम हो गए। दोपहर लगभग तीन बजे सूर्य देवता ने दर्शन दिए फिर भी लोगों को ठंड से राहत नहीं मिली। इतना जरूर था कि धूप निकलने के बाद लोग घरों की छतों और पार्कों में बैठे नजर आए। इस बीच दिन ढलते ही शाम करीब पांच बजे मौसम में तेजी से बदलाव से लोग ठंड से सिकुड़ने लगे। रात करीब आठ बजे सड़कों पर सन्नाटा पसर गया। रोड पर वाहनों की रफ्तार थम गई। गरीब, बेबस लोग सड़क किनारे आग का सहारा लेते दिखाई दिए। शहरवासियों का कहना था कि इस बार तो ठंड ने सारे रिकार्ड तोड़ दिए। पिछले तीन साल के मुकाबले इस बार जनवरी में ठंड ज्यादा पड़ रही है। मंगलवार के मुकाबले गुरुवार को मौसम में कुछ बदलाव रहा, लेकिन शीतलहर के कारण लोगों को राहत नहीं मिलती दिखी। दिनभर सड़कों पर अलाव जलाकर ठंड दूर करने वालों की भीड़ रही।