बदायूं। सरकारी अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए हर महीने करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। फिर भी मरीजों और तीमारदारों को कई समस्याओं से जूझना पड़ता है। मंगलवार को जिला अस्पताल की पड़ताल की गई तो सामने आया कि यहां तैनात अधिकांश वार्ड बॉय आराम कर रहे हैं। तीमारदार मरीजों को स्ट्रेचर पर बैठाकर ले जा रहे हैं। जिला अस्पताल में 44 वार्ड बॉय तैनात हैं। उनके वेतन पर हर महीने 13.2 लाख रुपये प्रतिमाह खर्च हो रहे हैं। इसके बाद भी मरीजोें और तीमारदारों को परेशान होना पड़ रहा है।
सुबह 10:10 बजे
खुद ले गए अल्ट्रसाउंड कराने
शहर के शहबाजपुर की रहने वाली जयदेवी को पेट में दर्द था। 26 मई को परिजनों ने उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया। मंगलवार को वार्ड से कोई कर्मचारी उनको अल्ट्रासाउंड कराने के लिए व्हीलचेयर लेकर नहीं आया। उसके बाद उनके तीमारदार व्हीलचेयर लाए और उनको लेकर अल्ट्रासाउंड कराने ले गए।
सुबह 10:30 बजे :
स्ट्रेचर नहीं मिला, कर्मचारी नदारद
दातागंज के गांव बेला के रहने वाले विजय ने बताया कि कल से वार्ड में भर्ती हैं। कर्मचारी न तो स्ट्रेचर ला रहे थे न ही उनको ले जा रहे थे। मजबूर होकर परिवार के लोग ही मरीज को स्ट्रेचर पर अल्ट्रासाउंड को ले गए। इस दौरान वार्ड बॉय सामने बैठे रहे।
सुबह 11:00 बजे
स्ट्रेचर खींचने से कर दिया मना
उघैती थाना क्षेत्र के गांव कुंदन निवासी प्रशांत शाक्य ने एक हफ्ते पहले जिला अस्पताल में भर्ती हुए थे। मंगलवार को पट्टी करवाने के लिए वार्डबॉय से कहा तो उसने मना कर दिया। ऐसे में तीमारदारों ने मरीज को स्ट्रेचर पर लिटाया और पट्टी कराने ले गए।
कोट,
- वार्ड बॉय की तैनाती ही इसलिए होती है कि वह मरीजों की सहायता करें। अगर वह लापरवाही कर रहे हैं तो जांच कर कार्रवाई कराई जाएगी। इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पहले भी कर्मचारियों को हिदायत दी जा चुकी है। वार्ड बॉय की ही जिम्मेदारी है कि वह मरीज को स्ट्रेचर या व्हील चेयर से लेकर जाए और जांच के बाद वार्ड तक छोड़े। - डॉ. कप्तान सिंह, सीएमएस, जिला अस्पताल
जिला अस्पताल में मरीज को व्हील चेयर पर ले जाते तीमारदार। संवाद
जिला अस्पताल में मरीज को व्हील चेयर पर ले जाते तीमारदार। संवाद
जिला अस्पताल में मरीज को व्हील चेयर पर ले जाते तीमारदार। संवाद