पांच साल पहले नवादा मधुकर गांव से रामगंगा की दूरी तीन किमी से भी ज्यादा थी। कटान करते-करते पिछले साल रामगंगा ने गांव में ही प्रवेश कर लिया। अनेक लोग बेघर हो गए। कृषि योग्य भूमि नदी में समा चुकी है। हर साल बाढ़ से होने वाली तबाही को लेकर गांव के लोग बरसात आने से पहले चिंता के सागर में डूब जाते हैं, लेकिन अब नवादा मधुकर के लोगों को शायद राहत मिल जाए। बचे-खुचे मकान अब बाढ़ की चपेट में न आएं, क्यों कि गांव के ही एक युवक के स्व प्रयास अब रंग लाने लगे हैं। पिछले साल नवादा मधुकर गांव पर रामगंगा का प्रकोप ज्यादा रहा था। कृषि योग्य भूमि के अलावा उनके मकान भी नदी में समा गए थे। 20 मकान कटने की पुष्टि तो प्रशासन ने ही की थी। अन्य कई लोगों ने मकान कटने की आशंका के मद्देनजर अपने आशियाने खुद ही ढहा कर उनकी ईटें-दरवाजे निकाल लिए थे। पिछले साल की विभीषिका को देख तो ये लगा था कि गांव का अस्तित्व ही मिट जाएगा। तब अचानक बाढ़ घटने से बाकी गांव कटने से बच गया था। ऐसे में इस गांव बचाने की कमान एक मीडिया कंपनी (दिल्ली) में कार्यरत गांव निवासी युवक कौशल कुमार तोमर ने थामी। दौड़भाग कर गांव को बचाने के लिए स्पेशल बजट स्वीकृत कराया। अब शासन से छह करोड़ 84 लाख 85 हजार की धनराशि स्वीकृत हुई है। बाढ़ खंड के अधिकारियों ने गुरुवार को क्षेत्र का दौरा कर स्थिति का जायजा भी लिया था, ऐसे में गांव के लोगों को आस बंधी है कि अब उनका गांव बाढ़ के कहर से बच जाएगा।
तीन करोड़ की धनराशि मिली
ग्राम प्रधान अशोक कुमार तोमर ने बताया कि इस परियोजना की पहली किस्त के रूप में तीन करोड़ की राशि आहरित हो चुकी है। इसकी सूचना शासन से उन्हें मिल चुकी है। गांव में बाढ़ खंड ने काम भी शुरू कर दिया है। मशीनें लग गईं हैं। बरसात का मौसम को देखते हुए दिन और रात ठोकरें आदि बनाने का काम चलेगा।
प्रमुख सचिव का रहा योगदान
कौशल कुमार तोमर के मुताबिक इस परियोजना को अमलीजामा पहनाने में सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव दीपक सिंघल का योगदान रहा। उन्होंने ही आकस्मिक परिस्थितियों के मद्देनजर यह धनराशि तत्काल स्वीकृत कराई है।
ग्रामीणों में है उत्साह
बाढ़ से होने वाली तबाही को रोकने के लिए कार्य के शुरू हो जाने के बाद से गांव के लोगों में भी उत्साह है। लोगों का कहना है कि उनके आशियाने अब बचे रहेंगे। उन्हें खानाबदोश का जीवन नहीं व्यतीत करना पड़ेगा। हर साल उन्हें नुकसान उठाना पड़ता था।