जिले में ग्राम पंचायतों को 14वें वित्त और राज्य वित्त का धन मिल जाने के बाद निर्माण कार्य को लेकरे आपाधापी का माहौल है। इधर, शासनादेश के तहत जब ग्राम पंचायतों में धन खर्च की गाइड लाइन आई तो पता लगा कि ग्राम पंचायतें विकास कार्य की कार्ययोजना बनाएंगे और डीएम इन कार्य योजनाओं को अनुमोदित करेंगे, तभी कार्ययोजनाओं पर काम होगा। इससे प्रधानों में खलबली मची हुई है। गाइड लाइन आने से पहले जहां कुछ काम हो गए, वहीं अब बाकी विकास कार्यों को कार्ययोजनाएं तैयार की जा रही हैं।
14वें वित्त का धन तो ग्राम पंचायतों को पिछले वित्तीय वर्ष में ही प्राप्त हो गया। इसकी गाइड लाइन मार्च के लास्ट में आ सकी। राज्य वित्त का धन भी जिले को प्राप्त हो गया। यहां बता दें कि गांव के विकास के लिए बड़ी धनराशि ग्राम पंचायतों के खातों में सीधे पहुंच गई हैं। जिले में 1,038 ग्राम पंचायतें हैं। ग्राम पंचायत निधि में विकास की राशि आते ही ग्राम प्रधानों की बांछे खिल गईं और सचिवों से मिलकर अधिकतर प्रधानों ने इस धन को जल्दी से जल्दी ठिकाने लगाने के लिए काम शुरू कर दिया। बताया जाता है कि चार से 12 लाख तक गांवों में विकास की राशि पहुंच चुकी है। गांव प्रधान इस राशि को जितनी जल्दी हो ठिकाने लगाने में जुट गए हैं। उनके सचिव भी उनका सहयोग कर रहे हैं।
इन्हीं हालातों के बीच जब धन को विकास कार्यों में लगाए जाने की गाइड लाइन आई तो प्रधान घूम गए। गाइड लाइन के अनुसार ग्राम पंचायतें विकास कार्यों की कार्य योजनाएं बनाएंगी और डीएम को अनुमोदन को भेजेंगी। इस गाइड लाइन पर काम शुरू हो गया है। प्रधानों को निर्देश हैं कि वह कोई भी विकास कार्य कराएं, इससे पहले कार्ययोजना जिलाधिकारी से अनुमोदित कराएं। ऐसे कार्य स्वीकार्य नहीं किए जाएंगे, जिन कामों को जिलाधिकारी ने अनुमोदित नहीं किया है। अगर, कुछ ग्राम पंचायतों ने करा भी लिए हैं, उनकी अलग से सूची भी डीएम को अब भेजनी होगी।
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कार्ययोजनाओं को खूब परखने के बाद ही ग्राम पंचायतों की कार्ययोजनाओं को अनुमोदन दिया जाएगा। इस संबंध में कार्ययोजनाओं को तैयार कर मेरे सम्मुख लाने के लिए ग्राम पंचायतों को निर्देशित किया जा चुका है। जल्दी ही कार्ययोजनाएं उनके पास आने लगेंगी। समुचित विकास के लिए उनका सहयोगात्मक रवैया रहेगा।
- सीपी त्रिपाठी, डीएम