गांवों के विकास को शासन कितना गंभीर है। इसका प्रमाण लोहिया गांव उदना-उदैया को देखकर लगाया जा सकता है। विकास कार्यों का करीब 12 लाख रुपये का भुगतान डेढ़ साल से अटका हुआ है। लेनदार ग्राम प्रधान का जीना मुहाल किए हैं।
समरेर की ग्राम पंचायत खुकुड़ी का मजरा उदना-उदैया को वर्ष 2012-13 में लोहिया गांव चयनित किया गया था। ग्राम प्रधान माया यादव ने बताया कि हर तीसरे दिन कोई न कोई अधिकारी गांव जरूर आता है। लखनऊ सचिवालय तक के अधिकारी गांव का दौरा कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि अधिकारियों के दबाव में 97 शौचालय और चार सौ मीटर खड़ंजा डलवा दिया। इसका लगभग 12 लाख रुपये का भुगतान डेढ़ साल का समय बीतने के बाद भी नहीं हुआ है। जिन लोगों से सामान उधार मंगवाया था। वह रोज घर पर आकर तकादा करते हैं। ग्राम प्रधान ने बताया कि भुगतान अटकने से अब आगे उधार सामान मिलना मुश्किल होगा। इसी तरह ग्राम पंचायत कादराबाद के प्रधान वीरेश शर्मा द्वारा मनरेगा से कराए हुए कार्यों का भुगतान पिछले एक साल से अटका पड़ा है। इनका मजदूरों और भट्टा मालिक आदि से कई बार भुगतान को लेकर विवाद हो चुका है। दोनों ही प्रधान डीएम से गुहार लगा चुके के है लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला है।
मनरेगा के कार्यों में पेपर वर्क ज्यादा होता है, फीडिंग आदि में देरी हो जाती है। अब उदना-उदैया का भुगतान जल्दी हो जाएगा।- खालिद अली, एडीओ पंचायत।