बदायूं। जिले भर में सफाई व्यवस्था चाक चौबंद बनी रहे, इसको लेकर जिला प्रशासन सख्त हो गया है। उसने साफ निर्देश दिए हैं कि गांव में सफाई की जिम्मेदारी प्रधान और सचिव की होगी। इसलिए दोनों लोग सुबह 10 से दोपहर 12 बजे के बीच में ग्राम पंचायत कार्यालय पर बैठक करेंगे। उसके बाद में दोपहर दो से तीन बजे तक ग्राम पंचायतों का भ्रमण कर सफाई की गुणवत्ता का निरीक्षण करेंगे। ग्राम पंचायतों में कार्यरत सफाई कर्मियों के पेरोल पर प्रधान और सचिव दोनों के हस्ताक्षर अनिवार्य हैं। उसी के आधार पर वेतन का भुगतान किया जाएगा।
बुधवार को कलक्ट्रेट स्थित अटल बिहारी वाजपेयी सभागार में डीएम कुमार प्रशांत, सीडीओ निशा अनंत ने ग्राम पंचायत विकास योजना के अंतर्गत जिला स्तरीय क्रियान्वयन व समन्वयन समिति की बैठक ली। उन्होंने डीपीआरओ डॉ. शरनजीत कौर को निर्देश दिए कि सभी ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की समीक्षा के लिए जिलास्तरीय अधिकारी नामित किए जाएं। विकास कार्य की समीक्षा में प्रधान, पंचायत सचिव, आशा, आंगनबाड़ी वर्कर, रोजगार सेवक, अध्यापक, सफाई कर्मचारी सहित अन्य संबंधित अधिकारी व कर्मचारी अनिवार्य रूप से उपस्थित हों। स्कूल, पंचायत भवन, आंगनबाड़ी केंद्र, नाली, इंटरलॉकिंग आदि विकास कार्यों की योजना बनाकर तैयार की जाए। वाटर रिचार्ज के लिए हैंडपंपों के पास सोकपिट बनवाए जाएं। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रधान, सचिव की जिम्मेदारी है कि गांव में साफ-सफाई नियमित होती रहे। किसी गांव से गंदगी की शिकायत मिलती है तो प्रधान, सचिव कार्रवाई को तैयार रहें। प्रधान व सचिव सुबह 10 से 12 बजे तक ग्राम पंचायत कार्यालय पर बैठक करें, दोपहर दो से तीन बजे तक ग्राम पंचायतों का भ्रमण कर सफाई की गुणवत्ता का निरीक्षण करें। ग्राम पंचायतों में कार्यरत सफाई कर्मियों की पेरोल पर प्रधान व सचिव दोनों के हस्ताक्षर अनिवार्य हैं, अन्यथा उनके वेतन का भुगतान नहीं किया जाएगा।