बदायूं के फैजगंज बेहटा थाना क्षेत्र के गांव राजा की सीकरी में बिना अनुमति आंबेडकर प्रतिमा लगाने को लेकर मंगलवार को हुए बवाल के बाद बुधवार को गांव में पुलिस तैनात रही। पुलिस ने मामले में दो एफआईआर दर्ज कर नौ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। थाना प्रभारी सुभाष कुमार की ओर से दर्ज मुकदमे में 10 महिलाओं समेत 32 नामजद व अज्ञात आरोपी हैं। इन पर बलवा, हत्या के प्रयास और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की धाराएं लगाई गई हैं। पुलिस ने रात में ही मुनेश कुमार, अमरपाल, उदयवीर, मोहित सिंह, नेम सिंह, मेघ सिंह, अमन, शिवम व दिनेश को गिरफ्तार कर बुधवार को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। दूसरी एफआईआर प्रशासक ने चार आरोपियों पर जमीन कब्जाने व साजिश की दर्ज कराई है। एसएसपी अंकिता शर्मा ने बताया कि गांव में शांति है और बाकी आरोपियों की तलाश में दबिश दी जा रही है।
बदायूं बवाल प्रकरण
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ढाई घंटे तक किया था बवाल
राजा की सीकरी गांव में भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा बिना अनुमति सरकारी भूमि पर स्थापित करने से रोके जाने के बाद ग्रामीणों ने ढाई घंटे तक बवाल किया था। इंस्पेक्टर सुभाष कुमार की ओर से दर्ज कराई गई रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार शाम 5.55 बजे से देर शाम 8.20 बजे तक बवाल चला था। मौजूद कर्मचारियों के सहयोग से पथराव और गाड़ियों में तोड़फोड़ करने वालों की मोबाइल फोन से बनाई गई वीडियो रिकॉर्डिंग से पहचान की गई है। इसके बाद उनके नाम मुकदमे में खोले गए।
राजा की सीकरी गांव में पसरा सन्नाटा
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बवाल के बाद गांव की गलियों में सन्नाटा
राजा की सीकरी गांव में बवाल-पथराव के बाद बुधवार को भी तनावपूर्ण माहौल बना रहा। गिरफ्तारी के डर से नामजद ग्रामीण घरों से गायब रहे। गांव की गलियां सूनी नजर आईं। यहां तक कि गांव के अंदर की दुकानें भी बंद रहीं। अधिकांश लोग अपने घरों के अंदर ही रहे। गांव में सामान्य दिनों की तरह चहल-पहल और आवाजाही दिखाई नहीं दी। एहतियातन पुलिस और पीएसी के जवान गांव में चप्पे-चप्पे पर तैनात रहे। हर गतिविधि पर नजर रखी गई।
इसी जगह पर प्रतिमा लगाने का किया गया था प्रयास
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रामीणों को भड़काकर कराया गया था बवाल
सरकारी भूमि पर कब्जा करने की नीयत से कुछ ग्रामीणों ने गांव की महिला-पुरुषों को भड़काकर डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा स्थापित कराने के नाम पर बवाल कराया। पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने प्रतिमा लगाने के लिए ग्रामीणों को निजी भूमि उपलब्ध भी कराई थी। पूर्व प्रधान अपनी भूमि देने को तैयार थे, लेकिन माहौल खराब करने की साजिश रचने वालों ने ऐसी चिंगारी भड़काई कि विवाद मंगलवार की शाम बवाल और पथराव में बदल गया। अब पुलिस की कार्रवाई के डर से खुराफाती गांव छोड़कर भाग गए हैं। उनकी तलाश में दबिश दी जा रही है।
बवाल के बाद गांव में पसरा सन्नाटा
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बुधवार को गांव में घरों के दरवाजे बंद रहे। घटनास्थल की कुछ दूरी पर एक पेड़ के नीचे कुछ ग्रामीण बैठकर दूर से ही अधिकारियों के आवागमन को देखते रहे। घटनाक्रम की भी चर्चा करते रहे। गांव की मुख्य सड़क पर पत्थर पड़े दिखाई दिए। एसपी देहात डॉ. हृदेश कठेरिया, एसडीएम प्रियंका और सीओ अंशुमन श्रीवास्तव ने गांव पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। एसडीएम और सीओ गांव में ही कैंप करते रहे।
मौके पर पड़े ईंटों के टुकड़े
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सरकारी भूमि पर कब्जा करने के चल रहे थे प्रयास
गांव सीकरी में ग्राम समाज की भूमि पर कब्जा करने का प्रयास पिछले काफी दिनों से चल रहा था। इसके लिए गांव के ही एक समाज के लोगों की ओर से प्रधान से हस्ताक्षर कराने के भी प्रयास किए गए। गांव में प्रतिमा लाकर रख ली गई। इसके बाद भी किसी को उनकी ओर से भूमि पर प्रतिमा स्थापित करने के बहाने भूमि कब्जा करने की भनक नहीं लग सकी। मंगलवार को प्रतिमा स्थापित होने के बाद सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और कार्रवाई की।
पथराव से बचकर भागते पुलिसकर्मी (बवाल के दौरान की तस्वीर)
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
प्रशासक से कराने गए थे हस्ताक्षर
मामले की पड़ताल में सामने आया है कि विवाद की जड़ महज प्रतिमा स्थापना की नहीं, बल्कि ग्राम समाज की जमीन पर कब्जे की पहले से चली आ रही कोशिश थी। सीकरी गांव की प्रशासक ज्योति के पिता रामकुमार ने बताया कि गांव के ही मान सिंह, चमन सिंह और अन्य व्यक्ति उनके पास 23 अगस्त को ग्राम समाज की भूमि पर पार्क बनाने के लिए उनकी बेटी के हस्ताक्षर कराने आए थे।
ग्रामीण महिला से जानकारी करते डीएम और एसएसपी (घटना वाली रात की तस्वीर)
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उन्होंने ग्राम समाज की भूमि होने का हवाला देकर मना करते हुए कहा कि इसका पहले इंतखाब निकलवाकर ले आएं और इसकी अनुमति भी कराकर लाए। उन्होंने कहा कि केवल प्रशासक के हस्ताक्षर से इतना बड़ा काम नहीं हो पाएगा। इसके बाद उन लोगों ने 24 अगस्त की रात में ही ग्राम समाज की भूमि पर डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा लाकर रख दी। मंगलवार को पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बिना अनुमति प्रतिमा स्थापित करने पर आपत्ति जताई और उसे हटाने की बात कही थी।
गांव में तैनात रहे अफसर और पुलिस बल
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
डीआईजी ने बदायूं आकर जाना हाल
डीआईजी बरेली अजय कुमार साहनी ने बदायूं पहुंचकर पूरे घटनाक्रम की अधिकारियों से जानकारी की। उन्होंने कानून-व्यवस्था की स्थिति और अब तक की कार्रवाई की जानकारी ली। उन्होंने बताया कि विवाद ग्राम समाज की सरकारी जमीन पर बिना अनुमति प्रतिमा स्थापित करने के प्रयास को लेकर शुरू हुआ था। जिसको लेकर स्थिति बिगड़ी। प्रशासन की ओर से मौके पर स्थिति संभालने और प्रतिमा हटाने की कार्रवाई के दौरान भीड़ ने पुलिस-प्रशासन की टीम पर पथराव कर दिया। इसमें पुलिसकर्मी घायल हुए और कई वाहन क्षतिग्रस्त हुए। डीआईजी ने मामले में सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
डीएम और एसएसपी ने फोर्स के साथ किया पैदल मार्च
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
डीएम अवनीश राय ने बताया कि राजा की सीकरी गांव में शांति व्यवस्था कायम है। पुलिस हर गतिविधि पर नजर रखे हैं। प्रकरण की जांच भी कराई जाएगी ताकि सरकारी भूमि पर कब्जा करने के पीछे षड्यंत्र सामने आ सके।