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Budaun News: शक्ति लगते ही लक्ष्मण हुए मूर्छित, दर्शकों की आंखों से बहे आंसू

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आदर्श रामलीला क्लब दबतोरी की ओर से आयोजित रामलीला में लक्ष्मण को श​क्ति लगने पर मूर्छित होने का
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दबतोरी। आदर्श रामलीला क्लब दबतोरी की ओर से गांव में चल रही रामलीला में सोमवार रात कुंभकरण वध और लक्ष्मण शक्ति के प्रसंग की लीला का मंचन हुआ। लक्ष्मण के बहोश होने पर प्रभु श्रीराम का अभिनय कर रहे अनमोल चौहान का विलाप देखकर लोगों की आंखें भी भर आईं।
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प्रथम प्रसंग के मंचन की शुरुआत कुंभकरण के गहरी नींद से जगाने से हुई। छह महीने की गहरी नींद से जागने के बाद, जब कुंभकरण को पता चला कि रावण ने माता सीता का हरण किया है तो उसने रावण को समझाने का प्रयास किया। रावण के न मानने पर, उसने भाई का धर्म निभाते हुए युद्ध के मैदान में उतरने का फैसला किया।
युद्ध भूमि में भगवान राम के हाथों महाबली कुंभकरण का वध हुआ। द्वितीय प्रसंग में रावण के पुत्र मेघनाद ( इंद्रजीत) के बीच भीषण युद्ध का मंचन किया गया। मेघनाद ने कपट से लक्ष्मण पर वीरघातिनी शक्ति का प्रयोग किया, जिससे लक्ष्मण मूर्छित हो गए, लक्ष्मण के मूर्छित होते ही रामा दल में शोक की लहर दौड़ गई। इसके बाद लंका से सुषेण वैद्य को बुलाकर लक्ष्मण के प्राण बचाने का मार्ग खोजा गया।
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हनुमान जी संजीवनी बूटी की पहचान न होने पर पूरा द्रोणागिरि पर्वत ही उठा लाए। संजीवनी बूटी का रस पीते ही जैसे ही लक्ष्मण की मूर्छा टूटी। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट और जयकारों के साथ कलाकारों का उत्साह वर्धन किया। इस अवसर पर क्लब डायरेक्टर सतेंद्र सिंह एडवोकेट, गोविंद सिंह, पवन सिंह, ओमेंद्र, शिरीष प्रताप, अवधेश, हितेश, मिंटू चौहान, अतुल आदि मौजूद रहे।




कैकेई के वरदान के बाद राम लक्ष्मण और सीता के गए वन
बिल्सी। रामलीला मैदान पर चल रहे रामलीला मंचन के दौरान सोमवार रात राम वनवास की लीला का मंचन हुआ। मंचन में दिखाया गया कि अयोध्या के राजा दशरथ भगवान राम के राजतिलक की तैयारी कर रहे थे। तभी दासी मंथरा ने रानी कैकेयी को भड़का दिया। इसके बाद कैकेयी कोप भवन में चली गईं।
राजा दशरथ जब उन्हें मनाने गए तो कैकेयी ने उनसे दो वरदान मांगे। इनमें भरत के लिए राजगद्दी और राम के लिए चौदह वर्ष का वनवास शामिल था। राम के वनवास की बात सुनकर राजा दशरथ अचेत होकर गिर पड़े। उधर, भगवान राम पिता की आज्ञा मानते हुए सहर्ष वन जाने के लिए तैयार हो गए। साथ में लक्ष्मण और माता सीता भी गईं। यह हृदय विदारक दृश्य देखकर उपस्थित सभी दर्शकों की आंखें नम हो गईं।
वनवास लीला के बाद केवट लीला और निषाद राज मिलन लीला का भी मंचन किया गया। इस मंचन के दौरान अध्यक्ष संजीव वार्ष्णेय, आदित्य माहेश्वरी, जितेंद्र कुमार वार्ष्णेय, हरिओम राठौर, शेखर सक्सेना, सूर्यप्रकाश देवल, मनीष असावा, विवेक राठी, राकेश माहेश्वरी आदि मौजूद रहे। संवाद




विभीषण की शरणागति का हुआ मंचन



जगत। रामलीला महोत्सव में मंगलवार को दिन की रामलीला में रावण दरबार, विभीषण की शरणागति और प्रभु श्रीराम की ओर से उन्हें लंका का राजा घोषित करने का प्रसंग मंचित किया गया। रावण के दरबार में हनुमान जी के बल और पराक्रम को लेकर चर्चा हुई। इस दौरान विभीषण ने रावण को सलाह दी कि माता सीता को सम्मानपूर्वक प्रभु श्रीराम के पास वापस भेज दिया जाए। विभीषण प्रभु श्रीराम की शरण में पहुंचे। वानर दल ने पहले उन्हें संदेह की दृष्टि से देखा, लेकिन विभीषण ने प्रभु श्रीराम के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त की।


पूर्व विधायक ने किया मेले का उद्घाटन

जगत। रामलीला महोत्सव में पूर्व विधायक धर्मेंद्र शाक्य ने मेले का उद्घाटन किया। आयोजन को सफल बनाने में कमेटी के अध्यक्ष डॉ. केशव कुमार शर्मा, प्रबंधक सुनील कुमार गुप्ता, जनरल अध्यक्ष देवनारायण शर्मा, अनिल भारद्वाज, किशोरी लाल गुप्ता, रजनीश राठौर, संजीव सक्सेना, उमेश सक्सेना, नौवतराम श्रीवास्तव, महेश, अरविंद राठौर प्रजापति, विपिन गुप्ता, देवेंद्र सिंह यादव, जितेंद्र, सुखपाल, प्रमोद राठौर और विनय राठौर सहित कमेटी के पदाधिकारी एवं सदस्य सहयोग में रहे। संवाद

आदर्श रामलीला क्लब दबतोरी की ओर से आयोजित रामलीला में लक्ष्मण को शक्ति लगने पर मूर्छित होने का

आदर्श रामलीला क्लब दबतोरी की ओर से आयोजित रामलीला में लक्ष्मण को शक्ति लगने पर मूर्छित होने का

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