वर्ष 2015 की बोर्ड परीक्षा नकलविहीन हो पाने की उम्मीद इस बार भी कम ही है। दरअसल, जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय ने कई ऐसे कॉलेजों को परीक्षा केंद्र बना दिया है, जो पहले से नकल के लिए कुख्यात रहे हैं। नेताओं की सिफारिश और आर्थिक साठगांठ के चलते मानकों को भी दरकिनार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई। इसके बावजूद विभाग के अफसर दावा कर रहे हैं कि कोई भी दागी और मानक से हटकर सेंटर नहीं बनाया गया है।
बोर्ड परीक्षा को पारदर्शी बनाए जाने के लिए हर साल जतन किए जाते हैं। फिर भी हर बार यह प्रयास नकल माफियाओं के सामने बौने नजर आने लगते हैं। इस बार भी इससे कुछ अलग नहीं है। विभागीय जानकार बताते हैं कि परीक्षा केंद्रों की शक्ल में नकल के अड्डे बना दिए गए हैं। कहते हैं कि इसका खेल अनंतिम सूची जारी करने में शुरू हो गया था। यही कारण था कि 69 केंद्रों की सूची को जारी किया गया और बाद में आपत्ति, प्रत्यावेदन आने पर जिला प्रशासन की बैठक में यहीं केंद्र एकदम से बढ़ाकर सौ कर दिए गए। इसमें सफेदपोशों की सिफारिशों और माफियाओं की आर्थिक सांठगांठ के चलते विवादित स्कूलों को भी सेंटर सूची आसानी से शामिल कर लिया गया। नाम न छापने की शर्त पर एक शिक्षक ने दावा करते हुए कहा कि उनका सेंटर एसडीएम निरीक्षण में ओके मिला था। लेकिन बाद में पता चला कि वह सूची में नहीं है। पता लगाया तो उनकी रिपोर्ट खराब दी गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि वित्तविहीन स्कूलों को खासा तरजीह दी गई है। विभाग की माने तो इस बार छह राजकीय, 38 एडेड और 56 वित्तविहीन स्कूलों को सूची में शामिल किया गया है।
परीक्षा केंद्र बनाने में पारदर्शिता और मानकों का ध्यान रखा गया है। किसी भी प्रकार के दबाव का आरोप निराधार है। सभी की एसडीएम जांच भी आई है। परीक्षा में भी पूरी पारदर्शिता बरती जाएगी। - बीना यादव, डीआईओएस बदायूं।