यहां बता दें कि बेसिक स्कूलों में प्रत्येक बच्चे को निशुल्क
यूनिफार्म के दो-दो सेट दिए जाते हैं। दोनों सेट के लिए प्राइमरी के बच्चों
की यूनिफार्म को शासन से चार सौ रुपये दिए जाते हैं। गत सत्र में विभाग ने
बच्चों को यूनिफार्म उपलब्ध कराने को 75 फीसदी यानि की 300 रुपये की
धनराशि दे दी थी। बाकी 25 फीसदी यानि की 100 रुपये की धनराशि सत्यापन के
बाय दिए जाना था। जिले भर में यूनिफार्म की गुणवत्ता को परखने के लिए
अधिकारियों की टीमें गठित की गईं। इनमें विकास विभाग के साथ ही अन्य
विभागों के कर्मचारियों-अधिकारियों को लगाया गया था। सभी ने सत्यापन
रिपोर्ट भी अपने अधिकारियों को भेज दी। कई की सत्यापन रिपोर्ट में यह
दर्शाया गया कि कहीं पर सत्यापन के समय प्रधानाध्यापक नहीं मिले तो कुछ
स्कूल बंद मिले। इनके अलावा और भी कई कारण दर्शाए गए। जिसके चलते प्रशासनिक
अधिकारियों को सत्यापन रिपोर्ट में गड़बड़ी लगने लगी। इधर, सूत्रों ने
बताया है कि डीएम ने दुबारा से गत वर्ष वितरित की गई यूनीफार्म वितरण के
सत्यापन के निर्देश दिए हैं। विभागीय सूत्रों ने कहा कि सत्यापन को निर्देश
जारी कर दिए गए हैं। सत्यापन रिपोर्ट आने के बाद ही शेष बची 25 फीसदी रकम
का भुगतान होगा।
नये सत्र को नहीं मिला है बजट
इस साल वितरित
होने वाली धनराशि को अभी बजट नहीं आ सका है। जिसके चलते बच्चों को
यूनिफार्म वितरित होने का कार्यक्रम जिले में शुरु नहीं हो सका है। पता हो
कि शासन ने 20 जुलाई तक यूनिफार्म बच्चों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिया
था।