इस्लामनगर थाना क्षेत्र के गांव सिठौली से जुलाई 2014 में अगवा किए गए उमेश यादव मामले में जांच कर रही देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई की एक टीम शनिवार को सिठौली पहुंचे। दो सदस्सीय टीम में शामिल वी दीक्षित और बीके सिंह ने गांव में लोगों से पूछताछ की। इसके साथ ही पूरे गांव समेत इस्लामनगर कस्बे में पंफलेट लगाए। इनमें लिखा है कि जो भी व्यक्ति उमेश के बारे में सूचना देगा उसे दो लाख रुपये इनाम दिया जाएगा।
सिठौली निवासी उमेश यादव पुत्र चंद्रपाल 31 जुलाई 2014 को लापता हो गया था। उमेश के पिता चंद्रपाल का गांव के ही मनफूल यादव से जमीन को लेकर विवाद था। गांव के भूदेव की 52 बीघा जमीन मनफूल खरीदना चाहता था। इसमें से 26 बीघा जमीन उमेश के पिता चंद्रपाल ने खरीद ली थी। मनफूल ने 26 बीघा जमीन का बैनामा अपने बहनोई चरन सिंह निर्माण के नाम करा दिया था। चरन सिंह निर्माण का दामाद योगेश यादव उस वक्त आईजी बरेली जोन का स्टाफ अफसर था। जमीन के इस विवाद में 2002 में मनफूल पक्ष के रघुवीर की हत्या कर दी गई थी। हत्या के इस मामले में चंद्रपाल और उमेश को कोर्ट ने सजा सुनाई थी। मनफूल ने चंद्रपाल की 26 बीघा जमीन पर भी कब्जा कर लिया।
चंद्रपाल और उमेश को रघुवीर की हत्या के मामले में हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। 31 जुलाई 2014 को उमेश लापता हो गया। उमेश की मां सत्यवती ने थाने में अपहरण का मुकदमा दर्ज कराने को तहरीर दी, लेकिन पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज की। बाद में कोर्ट के आदेश पर अपहरण का मामला दर्ज कर लिया। विवेचना में मनफूल उसके बेटे अवधेश, विजय समेत गांव के ही मदन और लोचन के नाम प्रकाश में आए। इसे बाद भी कार्रवाई न होने पर पीड़ित पक्ष ने हाईकोर्ट में अपील की। कोर्ट ने फरवरी 2016 में मामले की सीबीआई जांच का आदेश दिया था। आरोप था कि मनफूल के कई रिश्तेदार पुलिस में हैं। ऐसे में वह जांच प्रभावित कर रहा है। कोर्ट के आदेश के बाद मामले में सीबीआई ने जांच शुरू कर दी है।