बदायूं। स्वास्थ्य विभाग की कई सेवाओं से जुड़ी जिलेभर की दो हजार से अधिक आशा-संगिनी कार्यकर्ता पिछले पांच दिन से धरना देकर अपने हक के लिए आवाज बुलंद कर रही हैं। उन्होंने कहा कि उनको राज्य कर्मचारी का दर्जा देते हुए 20 प्रतिशत मानदेय में बढ़ोतरी करें या फिर आशाओं का 21,000 और संगिनी का 26000 रुपये फिक्स करें।
उत्तर प्रदेश आशा संगिनी वर्कर्स यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष विमलेश ने कहा कि ई-कवच पर कार्य करने के लिए आशाओं व संगिनी को स्मार्टफोन दिया जाए। मोबाइल रिचार्ज में आशा संगिनी को 250 रुपये से बढ़ाकर 350 रुपये किया जाए। किसी भी आशा या संगिनी की मृत्यु होने पर अश्रितों को नौकरी दी जाए।
जिलाध्यक्ष सुधा रानी ने कहा कि संगिनी 40 किलोमीटर की दूरी तय कर सुपरविजन का कार्य करती हैं। इसके लिए 300 के स्थान पर 700 रुपये विजिट दी जाए। शहरी आशा स्वास्थ्य संघ की जिलाध्यक्ष किशनवती ने कहा कि आशा लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाओं में रीढ़ की तरह भूमिका निभा रही है। बावजूद इसके उन्हें समान कार्य के लिए स्थायी कर्मचारियों के समान वेतन और अन्य बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं, जो कि अन्यायपूर्ण है।
अलका सक्सेना ने कहा कि हर महीने में तिथि घोषित करें, ताकि उस तिथि को मानदेय मिल सके। विजय लक्ष्मी ने कहा कि 10 लाख दुर्घटना बीमा, 10 लाख का स्वास्थ्य बीमा कराएं। ईपीएफ व ईएसआई का लाभ देने व सरकारी अस्पतालों में आशाओं का विश्राम गृह बनवाने की मांग की।
-
फोटो-18
प्रोत्साहन राशि का करें संपूर्ण भुगतान
बदायूं। उत्तर प्रदेश आशा व संगिनी वर्कर्स यूनियन के बैनर तेल आशा-संगिनी ने मालवीय आवास पर बैठक की। उसके बाद में डीएम को ज्ञापन दिया। जिलाध्यक्ष जौली वैश्य ने कहा कि सात फरवरी 2026 को स्वास्थ्य मंत्री और यूनियन पदाधिकारियों से वार्ता हुई। इसमें 13 सूत्री मांगों पर सहमति दी गई थी, बावजूद इसके अब तक उसको ठोस रूप से आकार नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि आयुष्मान कार्ड सृजन और आभा आईडी में किए गए योगदानों की प्रोत्साहन राशि का संपूर्ण भुगतान किया जाए। इस मौके पर नीलम, मुनीषा यादव, प्रीति शर्मा, वीना चंदेल, लक्ष्मी, सुनीता आदि मौजूद रहीं। संवाद
मालवीय आवास पर बैठक की करती आशा। संवाद