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Budaun News: दो और नवजात ने तोड़ा दम... 20 लाख से खरीदी गईं सीपैप मशीनें हो रहीं कबाड़

Sun, 11 Aug 2024 01:51 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं

सार

बदायूं के महिला जिला अस्पताल में सीपैप मशीन के अभाव में हर माह लगभग 25-30 नवजातों की  मौत हो रही है। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं दे रहे।
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महिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में भर्ती नवजात। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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बदायूं के महिला जिला अस्पताल में सीपैप मशीन के अभाव में दो जुड़वा नवजात ने एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबार्न केयर यूनिट) में दम तोड़ दिया। हर महीने एसएनसीयू में 25-30 नवजात सीपैप मशीन के अभाव में दम तोड़ रहे हैं। 

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यह हाल तब है जब बीस लाख रुपये कीमत की चार सीपैप मशीन दो साल पहले शासन से मिले बजट से खरीद कर रख ली गईं। जो अब कबाड़ होने की कगार पर हैं। विभाग ने अभी तक इन मशीनों को एसएनसीयू में लगाने की जहमत नहीं की है। जिस कारण आए दिन किसी न किसी नवजात की मौत हो रही है।

म्यारी गांव निवासी देवकी को प्रसव पीड़ा होने पर बृहस्पतिवार दोपहर महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शाम करीब पांच बजे उसने जुड़वां बेटियों को जन्म दिया। सात माह में प्रसव होने के कारण नवजात काफी कमजोर थे। 

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एसएनसीयू में भर्ती किए थे नवजात 
उनके फेफड़े पूरी तरह से काम नहीं कर रहे थे। नवजातों को एसएनसीयू में भर्ती कराया गया। डॉक्टर ने शुक्रवार सुबह सीपैप मशीन न होने की बात कहते हुए बच्चों को लखनऊ या फिर अलीगढ़ रेफर करने की बात कही। परिजन ने गरीबी का हवाला देते हुए डॉक्टर से यहीं इलाज करने की गुहार लगाई। 

शुक्रवार दोपहर बाद दोनों नवजात ने सीपैप मशीन के अभाव में दम तोड़ दिया। जुडवां नवजात की मौत के बाद परिजन उनके शव लेकर रोते बिलखते हुए गांव लौट गए। उनका कहना है कि अगर लखनऊ या अलीगढ़ जाने के लिए रुपये होते तो सरकारी अस्पताल में ही बच्चों को भर्ती क्यों कराते। 

हर माह तोड़ रहे 25-30 नवजात 
सीपैप मशीन के अभाव में हर माह लगभग 25-30 नवजातों की  मौत हो रही है। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं दे रहे। एसएनसीयू में बेहद गंभीर बच्चे भर्ती किए जाते हैं। ऐसे में इन बच्चों को दवा के साथ-साथ  वेंटिलेटर या सीपैप मशीन की आवश्यकता होती है। 

दो साल पहले 20 लाख रुपये खर्च कर खरीदी गईं चारों सीपैप मशीन को आज तक नहीं लगाया गया। मशीन अब तक क्यों नहीं लगाई गईं अगर इसकी जांच हो जाए तो जिम्मेदारों काे जवाब नहीं दे मिलेगा। लेकिन न कोई जांच न कार्रवाई। 
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यह है सीपैप मशीन का कार्य 
डॉक्टर संदीप कुमार ने बताया कि जो बच्चे कम समय में जन्म लेते हैं उनके फेफड़े पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाते। उनको सांस लेने में दिक्कत होती है। ऐसे बच्चों को सीपैप मशीन या वेंटिलेटर की आवश्यकता होती है।  सांस लेने में दिक्कत होने पर सीपैप मदद करता है। 

वहीं, महिला अस्पताल सीएमएस डॉ. इंदुकांत वर्मा ने बताया कि करीब दो साल पहले चार सीपैप मशीन खरीदी गईं थीं। इनको चलाने के लिए स्टाफ को प्रशिक्षित किया जाना था। कई बार पत्राचार किया गया लेकिन अभी तक ट्रेनिंग नहीं कराई गई। जब तक स्टाफ प्रशिक्षित नहीं होगा तब तक सीपैप मशीन संचालित नहीं की जा सकती।
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