हर माह तोड़ रहे 25-30 नवजात
सीपैप मशीन के अभाव में हर माह लगभग 25-30 नवजातों की मौत हो रही है। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं दे रहे। एसएनसीयू में बेहद गंभीर बच्चे भर्ती किए जाते हैं। ऐसे में इन बच्चों को दवा के साथ-साथ वेंटिलेटर या सीपैप मशीन की आवश्यकता होती है।
दो साल पहले 20 लाख रुपये खर्च कर खरीदी गईं चारों सीपैप मशीन को आज तक नहीं लगाया गया। मशीन अब तक क्यों नहीं लगाई गईं अगर इसकी जांच हो जाए तो जिम्मेदारों काे जवाब नहीं दे मिलेगा। लेकिन न कोई जांच न कार्रवाई।
यह है सीपैप मशीन का कार्य
डॉक्टर संदीप कुमार ने बताया कि जो बच्चे कम समय में जन्म लेते हैं उनके फेफड़े पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाते। उनको सांस लेने में दिक्कत होती है। ऐसे बच्चों को सीपैप मशीन या वेंटिलेटर की आवश्यकता होती है। सांस लेने में दिक्कत होने पर सीपैप मदद करता है।
वहीं, महिला अस्पताल सीएमएस डॉ. इंदुकांत वर्मा ने बताया कि करीब दो साल पहले चार सीपैप मशीन खरीदी गईं थीं। इनको चलाने के लिए स्टाफ को प्रशिक्षित किया जाना था। कई बार पत्राचार किया गया लेकिन अभी तक ट्रेनिंग नहीं कराई गई। जब तक स्टाफ प्रशिक्षित नहीं होगा तब तक सीपैप मशीन संचालित नहीं की जा सकती।