बाहरी नहीं बल्कि कर्मचारी ही विभाग की किरकिरी कराने पर तुले हैं। सर्व शिक्षा अभियान में एक पत्रांक संख्या पर दो पत्र निर्गत करने का मामला प्रकाश में आया है। अधिकार न होने के बावजूद भी एसएसए के एक अधिकारी ने पत्र जारी कर दिया। इतना ही नहीं चुपचाप जारी पत्र की एंट्री भी मुख्य डिस्पैच रजिस्टर में दर्ज नहीं है। इससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि कोई और रजिस्टर भी बनाया हुआ है। बीएसए को गुमराह किया जा रहा है।
सर्वशिक्षा विभाग में जो भी डिस्पैच होते हैं उसका एक रजिस्टर मेनटेन होता है। इसमें रोजाना निर्गत होने वाले पत्र पत्रांक संख्या डालने के बाद निर्गत किए जाते हैं। सूत्रों पर गौर करें तो सर्व शिक्षा अभियान से एक पत्रांक संख्या पर दो पत्र निर्गत होने का मामला प्रकाश में आया है। बताते हैं कि इसमें एक पत्र बीएसए द्वारा अप्रैल माह में निर्गत किया गया है। जो रजिस्टर में दर्ज भी है। वहीं एसएसए के एक अधिकारी की ओर से भी पत्र को एक ही पत्रांक संख्या पर निर्गत करने का मामला सामने आया है। बताते हैं कि पत्रांक संख्या(5-9) पर निर्गत पत्र में लेखाकार से स्पष्टीकरण मांगा गया है। जबकि इसी पत्रांक संख्या पर अप्रैल में राज्य सूचना को भी पत्र निर्गत हो चुका है। इससे यह भी साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि विभागीय अधिकारियों से चुपचाप छुपाकर भी कोई और डिस्पैच रजिस्टर बनाया गया है। हालांकि एसएसए के अधिकारी ऐसे किसी भी पत्र निर्गत होने की बात से इंकार कर रहे हैं। इधर, बीएसए कृपा शंकर वर्मा का कहना है कि मामला संज्ञान में नहीं है। अगर, ऐसा है तो यह गलत है, इसकी जानकारी की जाएगी। जो भी दोषी होगा उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।