काफी देर बाद गोताखोरों को प्रियांशु मिला। उस वक्त प्रियांशु की सांसें चल रही थीं। परिजन इलाज के लिए उसे लेकर कासगंज को चले गए, लेकिन रास्ते में ही मौत हो गई। शिवानी का शव करीब डेढ़ बजे मिला। कछला चौकी इंचार्ज प्रमोद कुमार ने बताया कि तेज बहाव की वजह से शिवानी करीब आधा किलोमीटर दूर तक बहता चला गया था। परिजनों ने पुलिस कार्रवाई से भी इनकार कर दिया था। दोनों के शव का पोस्टमार्टम भी नहीं कराया गया।
कछला में पक्के घाट की दरकार
कछला घाट पर बदायूं, बरेली जिले के अलावा गंगा पार से कांसगज, हाथरस, आगरा, मथुरा, एटा, फिरोजाबाद के अलावा राजस्थान और मध्यप्रदेश से भी श्रद्धालु आते हैं। राजस्थान में कछला घाट के अलावा सोरों (कासगंज) क तीर्थस्थल का खास महत्व है।
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दशहरा के अलावा पूर्णिमा वाले दिन तो कछला घाट श्रद्धालुओं की संख्या काफी नजर आती है। बताते हैं कि गंगाघाट पर श्रद्धालुओं के अनुरूप व्यवस्था नहीं की जाती। नगर पंचायत के कुछेक कर्मचारी और चौकी के पुलिस कर्मी ही घाट पर नजर आते हैं। गोताखोर आसपास इलाके के हैं। उन्हीं के रहमोकरम हादसों के दौरान कुद हद तक श्रद्धालुओं को बचाने में सफलता प्राप्त कर ली जाती है।