तहसील क्षेत्र के गांव सिद्धपुर चित्रसैन में बौद्ध जागृति मिशन के तत्वावधान में चल रही सात दिवसीय बौद्ध कथा के पांचवें दिन कथावाचक सुधा शाक्य ने सत्य के आचरण को लेकर विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि आज मानव सत्य के मार्ग से भटक गया है। जिसके कारण वह तमाम कष्टों से घिर गया है। इसलिए आज मानव को सत्य का मार्ग अपनाना होगा। कथावाचक ने कहा कि आज मानव सत्य से दूर होता जा रहा है शास्त्र कहता है कि सत्य अगर आचरण में न हो तो कम से कम उसे स्वीकार करना चाहिए। समस्त सृष्टि का संचालन ही सत्य के आधार पर हो रहा है जीव बिना आधार के टिक नहीं सकता, इसलिए सत्य के मार्ग का अनुसरण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक दर्शन के अनुसार अपनी आत्मा का संग ही सच्चा सत्संग है क्योंकि आत्मा अजर-अमर, निर्लय, निर्विकार और परम सत्य है। शास्वत है कि जब तक मानव अत्तर्मुख नहीं होगा उसे अपनी पहचान नहीं होगी। चाहें वह किसी जाति किसी वर्ग या किसी श्रेणी का हो, कल्याण नहीं हो सकता। उन्होंने कहा जिस तरह से पृथ्वी से एक मिट्टी का एक ढेला उठाकर आप ऊपर की ओर फेंक कर इसका प्रयोग करके देख सकते है। वह तब तक घूमता रहेगा जब तक लौट कर पृथ्वी पर नहीं आ जाता। ठीक उसी तरह से आत्मा भी सत्य का अंश है वह तब तक शांति को प्राप्त नहीं होगी जब तक अपने अंशी में नहीं मिल जाती है। इससे पहले कथावाचक ने कई और बड़े प्रसंगों को मार्मिक ढंग से पेश किया। इससे पहले कथावाचक रामनिवास शास्त्री ने भी बौद्ध कथा के कई प्रसंग सुनाएं।
इस मौके पर डा.बीपी मौर्य, नेत्रपाल शाक्य, महेश चंद्र शाक्य, चूरीलाल शाक्य, राकेश कुमार मौर्य, सोहनपाल शाक्य, ठाकुरदास, रवींद्र शाक्य, जयपाल, रामेश्वर दयाल शाक्य, भगवंत शाक्य, राजाराम शाक्य, चंद्रपाल शाक्य, लेखराज सिंह आदि मौजूद रहे।