बदायूं। पावर कॉरपोरेशन के द्वारा ट्रांसफार्मर के पास में मीटर लगाए गए थे, ताकि विभाग को बिजली चोरी पकड़ने में मदद मिलती। बिजली चोरी तो पकड़ में नहीं आई लेकिन विभाग की अनदेखी के चलते ट्रांसफार्मर के पास में लगे मीटर खराब हो गए और कुछ अपनी जगह से गायब हो गए। इतना सब हो जाने के बाद भी विभागीय अधिकारियों ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया। इससे विभाग को काफी ज्यादा राजस्व का नुकसान हो रहा है। हालांकि विभागीय अधिकारी दावा कर रहे हैं कि उनके स्तर से खराब मीटरों को सही कराने का काम किया जा रहा है।
आज के समय में हर कोई बिजली पर निर्भर हैं। बिना बिजली के लोग अपने आप को असहाय महसूस करने लगते हैं। इसको देखते हुए प्रदेश सरकार ने शहरवासियों को 24 घंटे बिजली देने के निर्देश दिए। निर्देश मिलने के बाद मेें शहरवासियों को भरपूर बिजली मिलने लगी। लेकिन पावर कॉरपोरेशन को राजस्व में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई। जिसके बाद में विभाग ने शहर में लगे 200 ट्रांसफार्मरों के पास में मीटर लगा दिए थे। ताकि उन्हें पता रहे कि किस मोहल्ले में कितनी बिजली की खपत हो रही है। और वहां से उन्हें कितना रुपये राजस्व के रूप में मिल रहा है। इससे उन्हें बिजली चोरी का अनुमान आसानी से लग जाएगा। लेकिन कुछ माह तो ये मीटर खंभों पर दिखाई दिए। जिसका फायदा पावर कॉरपोरेशन विभाग के अधिकारियों को मिला। लेकिन हल्के-हल्के ट्रांसफामरों से ये मीटर कहां गायब हो गए। इसके बारे में विभागीय अधिकारियों को कोई जानकारी नहीं है।
फाल्ट होने पर सप्लाई की जाती है शुरू
प्रदेश सरकार ने पावर कॉरपोरेशन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए है कि बिजली सप्लाई ज्यादा समय तक बाधित नहीं रहनी चाहिए। खासतौर पर ट्रांसफार्मर स्तर से खराबी आने पर। निर्देश मिलने बाद में विभाग ने इस दिशा में काम किया। एक निश्चित समयावधि में उस इलाके में सप्लाई सुचारु कर दी जाती हैं। वहीं ट्रांसफार्मर के पास में लगे मीटर से कोई फाल्ट होता है। तो विभाग पहली प्राथमिकता के आधार पर बिजली सप्लाई शुरू करते हैं। लेकिन मीटर खराब होने पर उसे बदलने को प्राथमिकता नहीं दी जाती है।
काफी पहले ट्रांसफार्मरों पर मीटर लगाए गए थे। इससे ये पता रहता था कि संबंधित इलाकों में कितनी बिजली की खपत हो रही है। साथ ही वहां पर मिलने वाले राजस्व से पता चल जाता है कि कितनी बिजली चोरी हो रही है। उसी आधार पर छापा मारा जाता है। पिछले दिनों कुछ मीटर खराब होने की बात पता चली थी, उन्हें सही कराया जा रहा है।
- राजीव कुमार, अधीक्षण अभियंता