सूर्यास्त के बाद द्वार-द्वार जगमगाएं यमदीप
दीपावली से एक दिन पूर्व मनाए जाने वाले यम दीप पूजन पर भी घरों को दीपों और बिजली झालरों से सजाया जाएगा। परंपरा है कि घर के दरबाजे पर दीप जलाकर पूजा करने से यम देव प्रसन्न होते हैं और रोग और शोक नहीं देते।
जुआरियों से दीपक बचाने को होती है मशक्कत
बदायूं। नरक चतुर्दशी, यमदीप पूजा के बाद दीपक की सुरक्षा के लिए परिवार वाले लगे रहते हैं। कुछ जगहों पर इस दीपक को जुआरी चुरा ले जाते हैं। उनकी मान्यता है कि यमदीप पास रखकर जुआ खेला जाए तो जीत होती है। इस भ्रमित करने वाली परंपरा के कारण लोग अपने-अपने दरबाजों पर दीपक की सुरक्षा करते हैं और दीपक बुझा जाने के बाद तुरंत उठाकर घर ले जाते हैं।
छोटी दिवाली के रूप में होता है पर्व
बदायूं। यमदीप पूजा दिवाली के एक दिन पूर्व होती है। इस दिन लोग पूजा के समय पटाखे भी दागते हैं और घरों और प्रतिष्ठानों को भी सजाते हैं। इसलिए इसे छोटी दिवाली भी कहते हैं।