सूरजकुंड के पास कार्यक्रम पर लगाई सख्ती के साथ रोक
बौद्ध अनुयायियों ने तत्काल रोक को दी हिटलरशाही की संज्ञा
जवाहरबाग कांड के बाद सूबे के जिलों में प्रशासन अब फूंक-फूंककर कदम रख रहा है। जिले के हुक्मरान बेहद सजग और चौकन्ने हैं। वह ऐसा कोई काम नहीं होने देना चाहते, जिससे माहौल खराब हो। इसकी एक बानगी बुधवार को देखने को मिली। अंतर्राष्ट्रीय बुद्ध पूर्णिमा महोत्सव के नाम पर सूरजकुंड के पास एकत्रित होने वाली भीड़ कोई गुल न खिला दे, इसलिए जिला और पुलिस प्रशासन ने यहां बौद्ध अनुयायियों का कार्यक्रम नहीं होने दिया। हालांकि इसमें केंद्रीय राज्यमंत्री उपेंद्र कुशवाहा को बतौर मुख्य अतिथि आना था, वो आए भी, लेकिन उनको सभा दूसरे स्थान पर ही करनी पड़ी।
इस एक्शन का अनुयायियों में रिएक्शन भी है। उन्होंने जिला प्रशासन पर हिटलरशाही का आरोप लगाते हुए कड़े तेवर दिखाए, लेकिन इस मामले पर राज्यमंत्री पूरी तरह चुप्पी साधे रहे। उन्होंने मौके पर जाकर सूरजकुंड को देखा, लेकिन कोई बयानबाजी नहीं की।
सूरजकुंड परिसर में अंतरराष्ट्रीय बुद्ध पूर्णिमा के उपलक्ष्य मेें महोत्सव होना था, लेकिन ऐन वक्त पर जिला प्रशासन ने घोषित कार्यक्रम स्थल पर कार्यक्रम नहीं होने दिया। बाद में मौर्य-शाक्य छात्रावास पर कार्यक्रम कराया गया। उनके आते ही बौद्ध धर्म अनुयायियों ने राज्यमंत्री से प्रशासन की शिकायत की और बताया कि कार्यक्रम में आने वालों ट्रैक्टर ट्रॉलियों का कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने ही नहीं दिया गया। दातागंज तिराहे पर ही भारी फोर्स तैनात कर दिया गया। वाहनों की सर्च की गई।
सूत्रों की मानें तो इस कवायद के पीछे जिला प्रशासन का जवाहरबाग कांड वाला भय ही था। बौद्ध अनुयायियों ने पहले ही सूरजकुंड स्थल के आसपास के इलाके को अपना बताना शुरू कर दिया था। इससे प्रशासन की पेशानी पर बल पड़े हुए थे। कहीं कोई और लोचा न हो जाए, इसलिए प्रशासन ने ऐन वक्त सख्ती दिखाकर कार्यक्रम को दूसरे स्थान पर आयोजित करा दिया। इससे बौद्ध समाज के लोगों में रोष है, लेकिन प्रशासन राहत महसूस कर रहा है।
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टेंट उखाड़ने और श्रमिक को पीटने का आरोप
बदायूं। अंतरराष्ट्रीय बुद्ध पूर्णिमा महोत्सव के आयोजक मंडल में शामिल केसी शाक्य ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि धार्मिक कार्यक्रम में पुलिस ने पूरा अड़ंगा डाला है। कार्यक्रम स्थल का टेंट उखाड़ फेंका। टेंट के श्रमिक की पिटाई की। यही नहीं सुदूर से आने वाली बौद्ध अनुयायियों की ट्रैक्टर ट्रॉलियां वापस करा दीं। बाद में मौर्य शाक्य छात्रावास में कार्यक्रम का आयोजन किया। इसी कार्यक्रम में केंद्रीय राज्यमंत्री उपेंद्र कुशवाहा मुख्य अतिथि बनकर पहुंचे थे।
यहां बता दें कि पिछले लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय बुद्ध पूर्णिमा महोत्सव मनाने के लिए सात सदस्यीय आयोजक मंडल गांव-गांव संपर्क कर चुका था। बुधवार को जब कार्यक्रम का दिन आया, तो उन्होंने पत्रक पर दिए गए स्थान सूरजकुंड के पास टेंट लगा दिए। केसी शाक्य समेत आयोजन समिति के सदस्यों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उनके धार्मिक आयोजन में हस्तक्षेप कर कार्यक्रमस्थल को तहस-नहस कर दिया। पांच थानों की पुलिस ने वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में महोत्सव में पहुंचने वाले रास्तों पर आने वाले बुद्ध अनुयायियों को लौटा दिया। कार्यक्रम स्थल पर पुलिस का पहरा रहा। शाक्य ने कहा कि वह इस मामले को वह देशभर में उठाएंगे।
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इतनी फोर्स तो साध्वी के आगमन पर भी नहीं
बदायूं। केंद्रीय राज्यमंत्री मानव संसाधन विकास उपेंद्र कुशवाहा के कार्यक्रम को लेकर जितनी फोर्स और प्रशासनिक व्यवस्था थी, उतनी पिछले माह आईं केंद्रीय मंत्री निरंजन ज्योति के लिए भी नहीं की गई थी। उन्हें तो गार्ड ऑफ ऑनर भी नहीं दिया गया। जबकि बुधवार को केंद्रीय राज्यमंत्री के आने पर उन्हें पीडब्ल्यूडी में गार्ड ऑफ आनर भी दिया गया। राज्यमंत्री के आगमन पर एडीएम वित्त राजेंद्र प्रसाद यादव, एडीएम प्रशासन अशोक श्रीवास्तव, एसपी सिटी अनिल यादव लगातार उनके कार्यक्रमों को नजर रखे रहे। शहर की कोतवाली, सिविल लाइंस, बिनावर, कुंवरगांव और उझानी की पुलिस, दातागंज सीओ श्यौराज सिंह और सीओ सिटी वंशराज यादव भी महोत्सव के निगरानी में लगाए गए थे।
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महोत्सव की परमीशन राज्यमंत्री के आने पर मिली
बदायूं। आयोजन समिति के सदस्यों का आरोप है कि उन्हें प्रशासन ने महोत्सव की परमीशन के लिए बेहद सताया। सिटी मजिस्ट्रेट ने एसडीएम तो एसडीएम ने एलआईयू और न जाने कहां-कहां चक्कर लगवाए। बावजूद इसके सूरज कुंड पर जो सम्राट अशोक के नाम पर ही बन रहा है और भगवान बुद्ध का स्मृति स्थल है। वहां कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी। जबकि महोत्सव की छात्रावास के लिए कोई अनुमति ही नहीं मांगी गई थी। आयोजक मंडल के सदस्य केसी शाक्य ने बताया कि उनके साथ अंकित मौर्य, आशीष शाक्य, केसी शाक्य, सुशील मौर्य, देवेंद्र शाक्य और मोहर सिंह शाक्य एडवोकेट आयोजन समिति के सदस्य हैं। इनमें से किसी ने भी मौर्य-शाक्य छात्रावास में महोत्सव की अनुमति नहीं मांगी थी।