प्रशासनिक जांच टीम का दावा, एक सप्ताह में डीएम को दी जाएगी रिपोर्ट
मुख्य अपराधी भी उजागर, पुलिस ने नहीं पकड़ा घोटाले करने वाला गैंग
बिल्सी तहसील प्रशासन को लांछित करने वाला करोड़ों का राहत चेक घोटाला 63 लाख रुपये की गड़बड़ी में ही सिमटकर रह गया है। प्रशासनिक टीम की जांच के लिए निर्धारित समय सीमा निकल चुकी है। जिले का यह बड़ा घोटाला उलझाऊ होता जा रहा है। पुलिस रिपोर्ट दर्ज करने केे बाद एक कदम भी आगे नहीं बढ़ी है। बिल्सी थाने के जांच अधिकारी एसआई ने ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध शाखा) को केस रेफर करने की कप्तान से सिफारिश तक कर डाली, अलबत्ता शासन की मंजूरी को केस गया है। तमाम ऐसे लोग हैं, जिन्होंने शपथपत्र देकर अपने को निर्दोष सिद्ध करने का प्रयास भी किया है। इस प्रकरण में तहसील के अधिकारियों ने अपने को सुरक्षित करना वरीयता में रखा है। राजनीति दबाव कहें या पुलिस की शिथिलता तहसील का सबसे बड़ा राहत घोटाला साफगोई के साथ खुलासे की ओर न बढ़कर मकड़जाल में फंसता दिखाई दे रहा है।
बिल्सी तहसील में पिछले दिनों हुए सूखा राहत का घोटाला अभी भी तमाम सवाल समेटे हुए है। इस घोटाले में जिम्मेदार राजस्व अधिकारियों को बचाने के प्रयास जांच के दौरान भी जारी रहे हैं। हालांकि जो राजस्व अधिकारी बिल्सी तहसील से स्थानांतरित हुए हैं, उन्हें भी रिलीव नहीं किया जा रहा है। एक महीना पहले इस प्रकरण का खुलासा हुआ, तो शासन तक सकते में आ गया। तहसीलदार बिल्सी ने इस मामले में बिल्सी थाने में ही रिपोर्ट दर्ज करा दी थी। इसके बाद गिरफ्तारी का कोई प्रयास नहीं हुआ। सरकारी धन वापसी का प्रयास अभी भी जारी है।
जांच के दौरान ही करीब 60 लोगों ने शपथपत्र देने के साथ 25 लाख रुपये की वापसी भी कर दी है। यह तरीका पुलिस अधिकारियों ने किसी से राय लेकर किया है। तहसील के राहत कोष में बैंक के माध्यम से धन जमा करने पर जोर अधिक दिया गया है। बिल्सी के एसआई व जांच अधिकारी स्वर्ण सिंह ने बताया कि महावीर प्रसाद, सतीश, भगवान सिंह, तीन लेखपालों समेत बहजोई का ढ़ाबा संचालक किशन यादव मुख्य अभियुक्त है। किशन यादव के परिवार वाले और रिश्तेदार भी शामिल हैं। बुलंदशहर, अलीगढ़, आगरा, हाथरस समेत कई अन्य जिलों में भी आपदा राहत के चेक दूसरों के खातों में जमा किए गए हैं। चेक हथियाने में उघैती थाने के गांव गंगरौली निवासी उनका किशन यादव का रिश्तेदार मास्टर उरमान और उसका पुत्र अजय भी इस प्रकरण में अभियुक्त बनाए गए हैं।
तहसील से कोरे चेक हथियाकर तमाम लोगों के खाते में डलवाकर धन निकाल लिया गया। इसमें करोड़ों का घोटाला होने का अनुमान है। बहजोई, जिला संभल में इस प्रकार का घोटाला पकड़ में आया, तो बहजोई की पीएनबी शाखा के मैनेजर से लेकर तमाम लोग इस घोटाले में जुड़े नजर आए। पीएनबी के मैनेजर को साजिश में शामिल होने का अभियुक्त नहीं बनाया गया है। जांच अधिकारी पर भी धन दोहन के आरोप लगने लगे हैं।
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पुलिस की जांच थमी
अपराध शाखा को केस ट्रांसफर करने के नाम पर पुलिस की जांच फिलहाल रुकी हुई है। कहने को तो छापामारी की बात की जा रही है, लेकिन अभी तक कोई अभियुक्त पुलिस ने गिरफ्तार नहीं किया है। ढ़ाबा संचालक मुख्य अभियुक्त का बहजोई में धंधा भी चालू है।
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प्रशासनिक जांच टीम कांवड़ यात्रा में होने के कारण जांच समय सीमा में पूरी नहीं कर सकी थी, लेकिन अब तक तमाम बैठकें और कागजातों की निगरानी हो चुकी है। करीब एक सप्ताह में प्रशासनिक जांच टीम अपनी रिपोर्ट डीएम को दे देगी।
- अशोक कुमार, एडीएम प्रशासन/ जांच टीम के सदस्य