बदायूं। उसहैत थाना क्षेत्र के गांव कड्डी नगला से छह मार्च को डेढ़ साल की बच्ची के अपहरण की वारदात को अंजाम देने वाले गैंग के तार तीन महिलाओं से जुड़े निकले हैं। माना जा रहा है ये महिलाएं बच्चा चोरी भी करवाती हैं। पुलिस इनके बारे में जानकारी जुटा रही है।
बच्ची के अपहरणकांड का पर्दाफाश करते हुए एसएसपी डॉ. बृजेश सिंह ने बताया कि कि शहर में गांधी मैदान के पास रहने वाले यशपाल, कुंवरगांव थानाक्षेत्र के ग्राम पड़ौलिया का अमन व अलापुर के सखानू कस्बा निवासी सागर को पुलिस ने रविवार रात मुठभेड़ में गिरफ्तार किया था। पूछताछ करने पर पता चला कि शहर की शिवपुरम कॉलोनी की गायत्री, छोटी व नेकपुर मोहल्ले में रहने वाली कुसुम के इशारे पर बच्ची का अपहरण किया गया था।
गिरोह की महिलाएं जरूरतमंद लोगों से संपर्क कर बच्चा उपलब्ध कराने का सौदा तय करती हैं। बताते हैं कि इन महिलाओं ने एक दंपती से बच्ची का सौदा किया था। बच्ची को देने के लिए तीनों ने गांव कड्डी नगला से पुष्पेंद्र की बेटी प्रभा का अपहरण कर लिया। दो दिन तक बच्ची को तीनों महिलाएं शहर में ही अपने-अपने घरों में छिपाकर रखे रहीं। पुलिस ने सोमवार को तीन महिलाओं समेत छह लोगों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
बिन ब्याही मां के बच्चों की सौदागर थीं तीनों महिलाएं
बच्ची के अपहरण के मामले में पुलिस ने जिन तीन महिलाओं को गिरफ्तार किया है उनसे पूछताछ में बड़ा खुलासा हुआ है। हालांकि पुलिस सीधे तौर पर कुछ नहीं कह रही, लेकिन चर्चा है कि तीनों महिलाएं बिन ब्याही मां के नवजात को बेचने का काम करती थीं। चोरी छिपे कुंवारी लड़कियों की डिलीवरी कराकर बच्चे को बेच दिया करती थीं। बदनामी के कारण लड़कियों के परिवार वाले खामोश रहते थे, जिस कारण यह मामला कभी पकड़ में नहीं आया।
महिला अस्पताल में ही घूमती रहती थीं तीनों महिलाएं
पकड़ी गईं तीनों महिलाओं का महिला अस्पताल से कोई सरोकार तो नहीं, लेकिन तीनों महिला अस्पताल परिसर में ही दिन भर घूमती रहती थीं। इस कारण कई लोग उन्हें स्वास्थ्य विभाग का कर्मचारी भी समझते थे। ये महिलाएं जिला महिला अस्पताल में आने वाली प्रसूताओं व बिन ब्याही मां पर नजर रखती थीं। महिलाएं बिन ब्याही मां को शहर के प्राइवेट अस्पतालों में ले जाकर, प्रसव के बाद उनके नवजातों को जरूरतमंदों को लाखों में बेच देतीं थीं। एक जरूरतमंद की मांग पर इस बार गिरोह ने नवजात शिशु नहीं मिलने पर इनके साथियों ने उसहैत से डेढ़ साल की बच्ची का दिनदहाड़े अपहरण कर लिया। इसके बाद पूरा गिरोह पकड़ा गया।
महिला अस्पताल से प्रसूताओं को ले जाने में चर्चा में आ चुका है तीनों का नाम
पुलिस ने भले ही बच्ची के अपहरणकांड के खुलासे में नवजात शिशुओं की तस्करी का जिक्र नहीं किया है, लेकिन पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने कई सच उजागर किए हैं, जिसे पुलिस अभी गोपनीय बनाए हुए है। तीनों महिलाओं के नाम पहले भी कई बार प्रसव की दलाली को लेकर चर्चा में आए थे, लेकिन इन पर कोई कार्रवाई नहीं हो की। आरोपियों ने बताया कि वह बिना ब्याही मां पर नजर रखते थे। जो बच्चा रखना नहीं चाहती थीं, उनके नवजातों को लेकर जरूरतमंद लोगों को बेच दिया करते थे।
जेल भेजे गए आरोपियों में यशपाल रिटायर्ड दरोगा तो अमन प्रधान का बेटा
कुंवरगांव थाना क्षेत्र के गांव पड़ौलिया का अमन पाल का पिता निरंजन पाल प्रधान है। वहीं, सहसवान क्षेत्र के गांव खंदक निवासी यशपाल के पिता रिटायर्ड दरोगा हैं। यशपाल कुछ साल पहले जिला अस्पताल में नर्सिंग की ट्रेनिंग करता था। इसके बाद वह महिला अस्पताल में पहुंचा। जहां से वह इन महिलाओं के संपर्क में आ गया। वहीं, सागर भी प्राइवेट अस्पताल में प्रैक्टिस करता था। इस वजह से तीनों का एक दूसरे से संपर्क हो गया। बता दें कि यशपाल और अमन को जेल भेजा जा चुका है।