रैपुरा गांव भी कटान की जद में चल रहा है। यहां करीब 100 बीघा खेती की जमीन गंगा में समा चुकी है। गांव के छविराम ने बताया कि 10 बीघा खेती की जमीन जिस पर धान की खेती थी गंगा में समा चुकी है। वहीं असमया रफतपुर में गंगा में कटान नहीं हुआ, लेकिन एक महीने से खेतों में लगातार पानी भरा रहा। इससे फसल बर्बाद हो चुकी हैं। गांव जाने वाले मार्ग पर भी गंगा का पानी चल रहा था। लगभग 80 किसानों की 600 बीघा खेती पर शकरकंद, धान, बाजरा, मक्का की खेती बर्बाद हुई है। ग्राम असमय रफतपुर के रमेश कुमार ने बताया कि 40 बीघा जमीन पर धान और बाजरा की खेती में पानी भरा रहने से बर्बाद हुई।
इन गांवों में हुआ कटान
गंगा नदी के डूब क्षेत्र प्रेमीनगला, जटा, जसवंत नगला, ठाकुरी नगला, रैपुरा, दलनगला, कदम नगला, कमलैयापुर, असमया रफतपुर, अहमद नगर बछौरा, बल्ले नगला, भुनडी, कमलू नगला, बेहटी, भकरी, चेतराम नगला, कोनका नगला, टिकाई खाम, द्विकली खाम आदि शामिल हैं।
क्या कहते हैं बाढ़ के पीड़ित किसान
किसान भंवर पाल ने बताया कि उनकी 8 बीघा खेती पानी भरा रहने से खराब हो गई, उनके खेतों में बाजरा और धान लगा हुआ था। खेती खराब होने के बाद मुआवजे के संबंध में कोई मदद अभी तक नहीं मिली है।
भुनडी गांव के राम सिंह ने बताया कि 18 बीघा का खेत था, जिसमें धान और यूकेलिप्टस की खेती हो रही थी, रात में पानी खेतों में घुस आया और कटान शुरू कर दिया, जिसके बाद सिंचाई का बोरिंग और इंजन भी कटान में चला गया, लाखों रुपए का नुकसान हुआ है। प्रशासन से कोई मदद नहीं मिली है।
कदमनगला गांव के अमित कुमार ने बताया कि 40 बीघा जमीन गंगा में समा गई, जमीन पर बाजार, धान और यूकेलिप्टस के पेड़ थे। खेती के बाद 140 गज में बना पक्का मकान भी गंगा में समा गया। मकान में 5 परिवार रहते थे, बाढ़ और कटान से लाखों का नुकसान हुआ है, प्रशासन की ओर से मकान के मुआवजे की प्रकिया चल रही है। खेती के नुकसान की भरपाई के बारे में अभी कोई सूचना नहीं है।
एसडीएम दातागंज विनोद कुमार ने बताया कि गंगा नदी के डूब क्षेत्र में अभी तक लगभग 300 हेक्टेयर खेती प्रभावित हुई है, ग्रामीणों को उनके नुकसान का सही मुआवजा मिल सके इसके लिए सर्वे कराया जाएगा।