ककराला में कवि सम्मेलन में काव्य पाठ करते कवि। स्रोत-आयोजक
बदायूं। ककराला में चल रहे शहीद मेले का तीसरे दिन समापन हो गया। शनिवार देर रात हुए कवि-सम्मेलन में कवियों ने अपनी रचनाओं से समा बांध दिया। कविताओं का आनंद लेते हुए श्रोताओं ने तालिया बजाकर साहित्यकारों का अभिवादन किया।
वरिष्ठ पत्रकार पंकज श्रीवास्तव ने कहा कि 1857 की क्रांति की बुनियाद पर आधुनिक भारत बना है। इसने साबित किया कि हिन्दू और मुसलमान खून के रिश्ते में बंधे हैं। इस दौरान कवि मुगले आजम उरौलवी ने कहा कि कदम-कदम पर मुझे डर दिखाई देता है, हवा के हाथ में मुझे खंजर दिखाई देता है।
समर बदायूंनी ने सुनाया- जो करते हैं हिफाजत सरहदों की, समझते हैं वही कीमत सरों की। रागिव ककरालवी, मुबीन ककरालवी, अजमत जिलानी, जाकिर अली ने अपनी रचनाओं से लोगों का दिल जीत लिया। संचालन वसीम नादिर ने किया। इस मौके पर कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अजीत यादव, आकिल खान, मेहरुल मेंबर साहब, आबिद अली, फैजियाब खान, तजम्मुल अंसारी आदि मौजूद रहे।