माधोटांडा का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र।संवाद
कलीनगर। माधोटांडा में सीएचसी को मंजूरी 2016 में मिली थी, तब से आजतक यहां किसी महिला चिकित्सक की तैनाती नहीं हुई है। इस कारण महिलाओं को 60 किलोमीटर की दूरी तय कर जिला अस्पताल अन्यथा निजी अस्पताल जाना पड़ता है। स्थानीय स्तर पर लोगों ने कई बार तैनाती की मांग की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
कलीनगर तहसील क्षेत्र के 30 से अधिक गांवों के लिए माधोटांडा गांव में एक मात्र सीएचसी की सुविधा है। नेपाल सीमा तक के गांवों के लोग स्वास्थ्य सेवाओं के लिए माधोटांडा सीएचसी आते हैं। इसमें महिलाओं की संख्या में अधिक रहती है। लंबी दूरी तय करने के बाद भी अस्पताल में महिला चिकित्सक न मिलने से उन्हें मायूस होना पड़ रहा है।
समस्या का समाधान न होने पर उन्हें जिला अस्पताल जाने के लिए 60 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है। यह समस्या सीएचसी की शुरूआत से ही है। इस समस्या को पूर्व में कई बार क्षेत्रीय लोगों ने उठाया। अफसरों और जनप्रतिनिधियों को पत्र भी दिए गए, लेकिन सुधार का दावा सिर्फ आश्वासन तक ही सीमित रहा। समस्या जस की तस है।
रोजाना होते हैं तीन से चार सामान्य प्रसव
माधोटांडा क्षेत्र का दायरा काफी बड़ा है। अस्पताल में रोजाना गर्भवती महिलाओं की आमद रहती है, लेकिन चिकित्सक के अभाव में उन्हें पूरनपुर सीएचसी या जिला अस्पताल जाने को कहा जाता है। अस्पताल में स्टाफ नर्स की मदद से रोजाना तीन से चार सामान्य प्रसव कराए जाते हैं। ऐसे में मजबूर होकर अधिकांश महिलाएं नजदीक के निजी अस्पताल में ही पहुंच रही हैं। वहां रुपये के लालच में ऑपरेशन कराने पर अधिक जोर दिया जा रहा है।
सीएचसी आने वाली महिलाओं की सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा जाता है। महिलाओं को नियमित जांच आदि के लिए पूरनपुर सीएचसी भेजा जाता है। अस्पताल में सामान्य प्रसव कराए जा रहे हैं। महिला चिकित्सक की तैनाती अभी नहीं हो सकी है। - राकेश कुमार, प्रभारी चिकित्सक