जिला अस्पताल में लगे फायर सिस्टम। संवाद
बदायूं। राजकीय मेडिकल काॅलेज के भवन में अग्निशमन प्रणाली (फायर फाइटिंग सिस्टम) मानकों के अनुरूप नहीं है। यही कारण है कि अग्निशमन विभाग ने कॉलेज प्रशासन को अपना अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं दिया है, बावजूद इसके कॉलेज प्रशासन मरीजों को बीते सात साल से भवन में भर्ती करता आ रहा है। अगर शार्ट सर्किट हो जाए या आग लग जाए तो मरीजों और तीमारदारों को जान बचाना मुश्किल होगा।
मेडिकल काॅलेज के भवन का निर्माण 2015 से अधूरा पड़ा है। साल 2017 से फायर फाइटिंग सिस्टम का काम पूरा नहीं हो सका है। अगर किन्हीं कारणों से आग लग जाती है तो उस पर काबू पाना असंभव होगा। आधे अधूरे संयंत्रों के अलावा कर्मचारी भी अप्रशिक्षित हैं। भवन के लिए अब तक फायर ब्रिगेड से एनओसी भी जारी नहीं हुई है। जगह-जगह लगे छोटे-छोटे यंत्र आग बुझाने में नाकाफी हैं।
सोमवार को पड़ताल की गई तो पता चला कि सभी वार्ड केवल चार अग्निशमन यंत्रों के सहारे हैं। फायर फाइटिंग सिस्टम की फिटिंग तो इन वार्डों में हो चुकी है, लेकिन वह काम तभी करेंगे जब मेडिकल कॉलेज का निर्माण पूरा हो जाए। निर्माण वर्ष 2013 से चल रहा है, जो 11 साल बाद भी अधूरा है। प्राचार्य ने बताया कि कार्यदायी संस्था को पत्र लिख रहे हैं ताकि जिन हिस्सों में वार्ड संचालित हो रहे हैं उन हिस्सों में जरूरत पर पूरा फायर फाइटिंग सिस्टम ऑपरेट हो, सिर्फ छोटे-छोटे अग्निशमन यंत्रों के सहारे न रहना पड़े।
एनओसी लेने और फायर फाइटिंग सिस्टम संचालित करने के लिए कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम को पत्र लिखा है। संस्था ने यह कहकर टाल दिया कि जब भवन का निर्माण पूरा होगा तब सिस्टम भी चल जाएगा। कार्यदायी संस्था से उस हिस्से में फायर फाइटिंग सिस्टम संचालित कराएंगे जिस हिस्से में मरीज भर्ती हो रहे हैं या फिर विद्यार्थियों की पढ़ाई हो रही है। - डॉ. एनसी प्रजापति, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज